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800 फीट ऊंचाई पर पानी, नीचे कुएं और हैंडपंप सूखे

7 वर्ष पहले
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बांसवाड़ा. श्रद्धालुओं के लाख प्रयास के बाद भी सरकार ने जब राखेश्वर महादेव के प्राचीन मंदिर की सुध नहीं ली तो लोगों ने ही उसकी दशा सुधारने का बीड़ा उठा लिया। पहले इक्का-दुक्का लोग इस काम में जुटे। धीरे-धीरे कई हाथ उनकी मदद के लिए बढ़ गए।

इसके लिए सारण ग्राम पंचायत के अधीन आने वाले चार गांवों काकनिया, कबलपुरा, सिंगली और बस्सी के 300 युवा आगे आए। ये सभी वे युवा थे, जिन्हें राखेश्वर महादेव मंदिर समिति के बैनर तले इस काम से जोड़ा गया। सभी ने इसमें प्रति युवा 500-500 रुपए का अंशदान किया।
इस प्रकार कुछ ही दिनों में डेढ़ लाख रुपए एकत्र हो गए। फिर क्या था, इसमें लोग श्रम के साथ-साथ धन से भी सहयोग में जुट गए और 20-21 दिनों पहाड़ को काटकर सूरत ही बदल दी। प्राचीन मंदिर और मेलास्थल पर जाने का रास्ता बन गया। हालांकि अभी यह रास्ता कच्चा है, लेकिन धीरे-धीरे इस रास्ते के पत्थर भी हटाकर इसे समतल किया जाएगा।

मंदिर समिति के अध्यक्ष बहादुर सिंहा मईड़ा बताते हैं कि पिछले 5 सालों से मंदिर परिसर में मेले का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने पंचायत से लेकर उपखंड प्रशासन से इस मंदिर में पहुंचने का रास्ता बनाने को कई बार आग्रह किया, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। इसके बाद ग्रामीणों ने सूरत बदलने का ठान ली और इसका नतीजा रहा कि पहाड़ को काटकर रास्ता बना दिया गया।

हरसाल मेला : सिंगलीसारण के करीब 300 ग्रामीण समिति के माध्यम से मेले का आयोजन कर रहे हैं। यहां पांच दिन का मेला लगता है। इस बार पिछले माह 18 नवंबर से शुरू हुआ था।

ग्राम पंचायत : सारण

पंचायत समिति : कुशलगढ़

दूरी : बांसवाड़ाशहर से 70 किमी

कहां : राखेश्वर महादेव मंदिर

>सितंबर-अक्टूबर : 800फीट ऊंचाई के पहाड़ पर चढ़कर जाना पड़ता था मंदिर

>नवंबर-दिसंबर : राखेश्वरमहादेव मंदिर के मेले में जाने का हो गया रास्ता

मोहकमपुरा से 7 किमी दूर सारण गांव के पास 800 फीट ऊंचाई पर स्थित श्रद्धास्थल राखेश्वर महादेव मंदिर पर जाने के लिए ग्रामीणों ने यह बनाया रास्ता।

घनघोर जंगल में यह मंदिर कुशलगढ़ के पावागढ़ के रूप में अपनी छंटा बिखेर रहा है। कुशलगढ़-टिमेड़ा मार्ग पर राखेश्वर महादेव के नाम से जानी जाने वाली गुफा में 12 माह घुटने तक पानी भरा रहता है।