बढ़ते अतिक्रमण से सिकुड़ रहा कुशलगढ़ का राजतालाब
घाटा क्षेत्र/कुशलगढ़. नगरके रियासतकालीन राजतालाब का पेटा लगातार बढ़ते अतिक्रमण के कारण धीरे-धीरे सिकुड़ता जा रहा है। नगर पालिका और प्रशासन द्वारा की जा रही इसकी उपेक्षा से अतिक्रमियों के हौसले बुलंद है, जिससे तालाब के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
राज्य सरकार के जल स्वावलंबन अभियान के तहत कुशलगढ़ पंचायत समिति के 11 गांवों में 27 करोड़ की लागत से 690 काम हो रहे हैं। लेकिन अफसोस की बात है कि नगर में स्थित राजतालाब की पर प्रशासन से लेकर पालिका तक का ध्यान नहीं गया। इसके चलते यह अतिक्रमण की भेंट चढ़ रहा है। तालाब के पेटे में लोगों द्वारा भराव डालकर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। वैसे राजतालाब मुंदड़ी पंचायत क्षेत्र में आता है, लेकिन पंचायत ने भी अब तक कभी भी तालाब के संरक्षण संवर्धन की ओर ध्यान नहीं दिया।
नगर पालिका चुनाव में सत्ताधारी भाजपा की ओर से घोषणा पत्र में भी इस तालाब का विकास करने का दावा किया गया था। इसके बावजूद इस पार्टी की ओर से तो इस तालाब की दुर्दशा पर ध्यान दिया गया और ही इसे मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना में लेकर दशा सुधारने की पहल की गई। इसके साथ ही इस तालाब पर विधायक, नगर पालिका प्रशासन के अधिकारी ही ध्यान दे रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि राजघराने के समय बना यह तालाब खुर्द-बुर्द हो रहा है और इसमें गंदगी का अंबार लगा है। जबकि तालाब में एक मंदिर भी स्थित है। नगर के शिवाजी मंच के भरत कुमावत, पंकज एम दोसी, वेस्ताराम वसुनिया, बिजीया भाई ने इस संबंध में कलेक्टर को पत्र लिखा है। पत्र में राजतालाब को मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना में शामिल करते हुए इसका विकास और सौंदर्यीकरण करने की मांग की है। इधर, भाजपा के जिला प्रतिनिधि जैनेंद्र सेठिया ने बताया कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को तालाब पर बढ़ते जा रहे अतिक्रमण की शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
कुशलगढ़. अतिक्रमण का शिकार होता नगर का रियासतकालीन राजतालाब।