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जीने की कला है जीवन विज्ञान : मुनि विजयराज
लाडनूं|यह विज्ञानमशीनीकरण का युग है। व्यस्त जीवनशैली से मनुष्य तनाव, कुंठा, अवसाद असंतुलित संवेगों की समस्या से ग्रस्त है। ये विचार जैन विश्वभारती के शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित जीवन विज्ञान-जीवन की कला कार्यक्रम में बोलते हुए जैन मुनि विजयराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सही मायने में जीवन विज्ञान संतुलित जीवन शैली की एक कला के रूप में हमारा मार्गदर्शन करता है। मुनि ने कहा कि वर्तमान आधुनिक परिपेक्ष्य में समाज में फैली मद्यपान, तंबाकू सेवन, दहेजप्रथा, भ्रूण हत्या, पर्यावरण प्रदूषण आदि व्यापक समस्याओं के समाधान के लिए अधिकाधिक अणुव्रत नियमों जीवन विज्ञान की गतिविधियों को जीवन का प्रमुख ध्येय बनाना चाहिए। शिक्षा विभाग के अध्यक्ष डॉ. बीएल जैन ने मुनि विजयराज का परिचय देते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन मानव एकता को समर्पित रहा है।