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स्मृति विकास के लिए लगातार अभ्यास जरूरी

7 वर्ष पहले
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जैनविश्वभारती विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के तत्वावधान में स्मृति विकास एवं क्रोध निवारण शिविर का आयोजन सोमवार को स्थानीय केसरदेवी बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित हुआ।

शिविर में दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक डॉ. आनंदप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि स्मृति विकास से ही विद्यार्थी का भविष्य उज्जवल बन सकता है। विद्यार्थी के जीवन में एकाग्रता का बहुत महत्व है, विद्यार्थी अपने जीवन में एकाग्रता से स्मृति का विकास कर सकते हैं। सैनिक क्षत्रिय सभा संस्थान के मंत्री जगदीशप्रसाद आर्य ने स्मृति विकास के लिए अभ्यास जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि अभ्यास के द्वारा ही व्यक्ति लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। जनसंपर्क समन्वयक डॉ. वीरेंद्र भाटी मंगल ने कहा कि क्रोध निवारण के लिए वाणी पर संयम आवश्यक है। वाणी संयम से अनेक समस्याओं का समाधान संभव है। विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती आभा सिंह ने स्मृति विकास के लिए जीवन विज्ञान एवं प्रेक्षाध्यान को महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम में योग-विशेषज्ञ डॉ अशोक भास्कर ने विद्यार्थियों को ध्यान, योग एवं महाप्राण ध्वनि का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया। इस अवसर पर जेपी सिंह, सुनीता आदि विद्यार्थियों को आसन-प्राणायाम, अनुप्रेक्षा, एकाग्रता के प्रयोग, एकाग्रता के लिए खेल, कायोत्सर्ग आदि का प्रशिक्षण दिया गया।

शिविर के बाद विद्यार्थियों ने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का भ्रमण कर विविध जानकारियां प्राप्त की।