जनकल्याण के लिए किए जाते हैं यज्ञ
श्रीराममहायज्ञ का संचालन कर रहे संत अवधेश दास महाराज ने कहा कि समाज को भटकाव से रोकना तथा धर्म गंगा का अविरल गति से समाज से प्रवाह बना रहे, लोग सद्आचरण कर राष्ट्र समाज के विकास के भागीदार बनें, इसी भावना के चलते संतगण समय समय पर यज्ञों धर्म अनुष्ठानों का आयोजन करते हैं। यज्ञ से वायु मण्डल का प्रदूषण खत्म होता है तथा भगवान इन्द्र खुश होकर वर्षा करते हैं, जिससे जीव मात्र का पालन होता है।
कपिल आश्रम के पीठाधीश्वर संत कपिल दास महाराज ने बताया कि जन कल्याण की भावना ही निहितार्थ होती है यज्ञों के आयोजन में। उन्होंने ने बताया कि संतों का जीवन परोपकार के लिए होता है। यज्ञ से लोगों को धन, यश, समृद्घि रोग निवारण के साथ साथ अनेकादि लाभ होते हैं।
यज्ञोंसे प्रसन्न होते हैं भगवान इन्द्र : प्रमुखज्योतिषाचार्य एवं यज्ञाचार्य पं. कैलाश चंद शर्मा ने बताया कि देवों का वैदिक मंत्रों विधि से किए गए यज्ञ को ही यज्ञ कहते हैं। यज्ञों तथा महायज्ञों से भगवान इन्द्र प्रसन्न होते हैं तथा अमृतमयी वर्षा करते हैं। यज्ञों से प्रजन्यों की उत्पत्ति होती है तथा वायुमंडल पवित्र होता है। यज्ञ ब्रह्मा प. कन्हैयालाल शर्मा ने बताया कि यज्ञों के माध्यम से धर्म का प्रचार-प्रसार होता है तथा वर्षा के जल से वनस्पति की पैदावार होती है जो जीव मात्र को स्वस्थ, निरोगी प्रसन्न रखती है।
लालसोट. महायज्ञमें उमड़ा श्रृद्धा का सैलाब।