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महानरेगा में 20 प्रतिशत भी नहीं हुए काम

5 वर्ष पहले
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महात्मागांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना अब ब्यूरोक्रेसी और राजनीति के बीच कमजोर होती जा रही है। महानरेगा में 20 प्रतिशत से अधिक काम भी नहीं हो पा रहे हैं। बीते दाे वर्ष के आंकड़े देखें तो 2014-15 में 18.50 प्रतिशत और चालू वर्ष में अब तक 11 प्रतिशत ही स्वीकृत काम हुआ है। वजह साफ है कि जिले में महानरेगा पर पूरी तरह शिकंजा कस दिया गया। उसकी अलग-अलग वजह हैं। 2014-15 में 827.62 करोड़ रुपए की वार्षिक योजना बनी थी लेकिन पूरे साल में सिर्फ 153 करोड़ रुपए के ही काम हुए। चालू वर्ष में 761.72 करोड़ रुपए के काम स्वीकृत हुए लेकिन अब तक सिर्फ 71 करोड़ रुपए के ही काम हुए। दो वर्ष में 20 प्रतिशत काम पूरे नहीं करने वाले जिला परिषद ने फिर से अगले साल के लिए 891 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बना दिया। यही वजह है कि पिछले दिनों जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक में भी इसी बात को लेकर सिर्फ हंगामा हुआ और सदस्यों ने सामूहिक रूप से बहिष्कार भी किया। उंगली सीधी कलेक्टर पर उठी क्योंकि कानून के अनुसार 100 दिन अकुशल श्रमिक श्रम करने का अधिकार समन्न किया गया है तो कलेक्टर द्वारा उसके अनुरूप मंजूरियां क्यों नहीं दी गई।

बहाना श्रमिकों का भी

महानरेगायोजना में काम करने केे लिए जिले में तीन लाख 45 हजार 922 जॉब कार्ड बने हुए हैं लेकिन एक्टिव श्रमिक दो लाख 86 हजार 292 हैं। विभाग का कहना है कि प्रोजेक्ट बनाते वक्त काम शामिल करते जाते हैं लेकिन बाद में श्रमिक नहीं मिलने पर काम नहीं हो पाता।

अब ग्रेवल सड़कों की

याद क्यों आई

महानरेगायोजना में ग्राम पंचायतों को ग्रेवल सड़कों का कराने का अधिकार है लेकिन जिला स्तर से इसकी स्वीकृति नहीं मिलने की वजह से ये काम रोक दिया गया। 25 जनवरी को मुख्यमंत्री को यहां आना था। अधिकांश सरपंच मुख्यमंत्री को इसकी शिकायत करने की योजना बना रहे थे। प्रशासन को भनक लगी तो आनन-फानन में ग्रेवल सड़कों को मंजूरी दी गई। एक महीने में ही 80 ग्रेवल सड़कों के निर्माण की स्वीकृति दी गई। अधिकारियों से एकाएक ग्रेवल सड़कों की याद आने की वजह पूछी तो जवाब है कि पहले अपना खेत-अपना काम पर फोकस है।

^ग्रेवल सड़कों की मंजूरी पिछले एक महीने में निकालनी शुरू की हैं। 80 सड़कों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। रही बात प्रस्ताव और क्रियान्विति की तो श्रमिकों की कमी के कारण योजना पूरी नहीं होती।

ओमप्रकाशगोदारा, एक्सईएन महानरेगा

^कलेक्टर नेग्राम पंचायतों द्वारा पारित सभी नरेगा कार्यों की स्वीकृतियां रोकी गई हैं। जिले में ग्रेवल सड़कों का काम जिसका 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा महानरेगा में होता है वह स्वीकृति के अभाव में रुका है।

मानिकचंदसुराना, विधायक लूणकरणसर

नेताओं का आरोप, अधिकारी कर रहे अनसुनी

योजनाके सिरे चढ़ने की वजह कागजों में भले ही श्रमिक या अन्य कारण गिनाए जा रहे हों लेकिन सही मायने में ये ब्यूरोक्रेसी और खांटी राजनीति वजह है। कलेक्टर का महानरेगा में सीधा हस्तक्षेप होता है। बिना उनके इशारे के कोई काम नहीं होता। राजनेता अपने हिसाब से काम कराना चाहते हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब काम प्रस्ताव में लिए गए तो उन्हें पूरा कराना चाहिए। यही वजह है कि पिछलेे दिनों मानिक चंद सुराना मुख्यमंत्री के सामने ये मुद्दा उठाया लेकिन सीएम ने अनसुनी कर दी मगर प्रशासन को डर है कि अगर ये मुद्दा किसी सत्ताधारी पार्टी के विधायक ने उठा दी तो समस्या खड़ी होगी।

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