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नावद में ठेके पर दिया मनरेगा का काम, कोटा बारां के मजदूर बना रहे सड़क, मशीनरी का भी इस्तेमाल

5 वर्ष पहले
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सरपंच सुखदेवाराम ने बताया कि क्वालिटी का काम करवाने के लिए बाहरी व्यक्ति को ठेका दिया। धांधली को लेकर गांव में कई लोगों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय मजदूर काम करना चाहते हैं परंतु सरपंच ने चहेते मजदूरों के नाम मस्टररोल में दर्ज कर ठेके पर काम शुरू करवा दिया है।

ठेकेदारके अंडर में करते हैं काम

मौकेपर कोटा निवासी उदा बंजारा, उसकी भाभी गीता देवी, प्रताप, हीराराम, राजू, मांगीलाल, दुवान, बादाम बाई, प्रेम आदि काम करते मिले। उदा बंजारा कहते हैं कि हम तो हमीद मोहम्मद के अंडर में काम करते हैं। परिवार के सदस्य सामूहिक रूप से काम करते हैं। नावद में सड़क का काम कर रहे हैं। मजदूर हीराराम कहते हैं कि हम तो मजदूरी करने आए हैं। बारां का रहने वाला हूं। हमें क्या पता काम नरेगा में हो रहा है अथवा और किसी योजना में। हम तो ठेकेदार के बुलावे पर काम करने गए हैं।

इसतरह करते हैं धांधली

मस्टररोलमें चहेते मजदूरों के नाम होते हैं। उनके खाते में रकम आती है। जिसे उठाकर ठेकेदार को लेबर का भुगतान किया जाता है। मशीनों का उपयोग कर ठेकेदार भी काम को फटाफट पूरा कर चलता बनता है जबकि मस्टररोल में मजदूरी के दिनों की संख्या बढ़ा दी जाती है।

सामग्रीखरीद में भी गड़बड़ी

सामग्रीखरीद में भी गड़बड़ी हुई है। पहले सामग्री का ठेका श्री राघव इंडस्ट्रीज बोरावड़ को दिया गया था। फर्म के मैनेजर हीरालाल रोलन ने लगभग ढाई लाख की सीमेंट, कंकरीट डाल दी परंतु बात कमीशन पर अटक गई। ग्रामसेवक ने प्राप्त सामग्री की रसीद ठेकेदार हीरालाल को नहीं दी। आनन-फानन में उसका ठेका निरस्त कर रानीगांव में काम कर रही एक ठेका फर्म को दे दिया गया।



सरकार को रखनी चाहिए मॉनिटरिंग

^नावदमें सरपंच ग्रामसेवक की धांधली सबके सामने हैं। स्थानीय मजदूरों से काम नहीं करवाकर ठेके पर नरेगा के काम को दे दिया। सरकार को लाखों के विकास कार्यों में पूरी मॉनिटरिंग भी रखनी चाहिए। उम्मेदसिंह, एक्स सूबेदार

कमीशन नहीं दिया तो ठेका निरस्त किया

^पहलेसामग्री सप्लाई का ठेका मुझे मिला था। सरपंच ग्रामसेवक ने 10 प्रतिशत कमीशन मांगा, मना किया तो मेरा ठेका निरस्त कर दिया एवं मेरे द्वारा आपूर्ति देने के लिए रखी सामग्री की रसीद भी नहीं दी। भिजवाई गई ढाई लाख की सामग्री भी ऐसे ही पड़ी है। गांव में सामग्री पहुंची उसकी ग्रामीणों वार्डपंच से प्राप्त रसीद मेरे पास है। -हीरालाल रोहलन, मैनेजर राघव इंडस्ट्रीज

वस्तु स्थिति पता करता हूं

^नावदमें काम अगर ठेके की लेबर मशीनरी से करवाया जा रहा है तो गलत है। पंचायत समिति एईएन को मौके पर भेजकर स्थिति पता करता हूं। नरेगा मद का काम बाहरी मजदूरों से नहीं करवाया जा सकता। डॉ.गोपालसिंह बोचल्या, विकास अधिकारी

बाल श्रमिक से भी करवा रहे हैं काम

^नावदमें चल रहे काम में सभी श्रमिक बाहर के हैं। एक बाल श्रमिक को भी लगाया। मैंने साधारण सभा बीडीओ को लिखित में शिकायत दी। मिलीभगती से भ्रष्टाचार हो रहा है। -गुलाब कंवर, पंचायत समिति सदस्य

बारां कोटा से मजदूर लाता हूं

^सरपंचने मुझे सात रुपए प्रतिवर्ग फीट के हिसाब से ठेका दिया है। बारां कोटा से मजदूर लाता हूं एवं काम ज्यादा होने पर एमपी से भी मजदूरों को बुलवा लेता हूं। वहां की लेबर थोड़ी सस्ती पड़ती है। नावद में काम शुरू किए दो दिन ही हुए हैं। हमीदमोहम्मद, निर्माण ठेकेदार

सामग्री का ठेका निरस्त, दूसरे को दिया

^पहलेवाले सामग्री ठेकेदार का ठेका निरस्त कर रानीगांव में काम कर रही ठेका फर्म रानाबाई कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया है। कितना बजट खर्च होना है पत्रावलियां देखकर बताऊंगा। वैसे कुल 8.46 लाख की लागत से ब्लॉक सड़क का काम होना है। -खींयाराम, ग्रामसेवक

मकराना. नावदमें मनरेगा सीमेंट ब्लॉक सड़क निर्माण में काम करते कोटा बारां के मजदूर।

प्रकाश प्रजापत| मकराना

मकरानाउपखण्ड क्षेत्र की ग्राम पंचायत धानणवा का नावद गांव, जहां 8.46 लाख में स्वीकृत सीमेंटेड पेवर सड़क का निर्माण नरेगा के तहत कराया जाना था। काम तो शुरू हो गया मगर मजदूर कोटा बारां जिले से बुलाए गए है। मशीनरी का भी इस्तेमाल हो रहा है। नावद में गवाड़ से जुणावों के घर तक चार इंच मोटाई की सीमेंटेड पेवर सड़क बनाकर इंटरलाकिंग सीमेंट ब्लॉक लगाए जाने हैं। सड़क की लंबाई लगभग 850 फीट एवं चौड़ाई 10 फीट है। पौने नौ लाख से बनने वाली सड़क में डेढ़ लाख रुपए मजदूरी और 7.41 लाख रुपए सामग्री पर खर्च होने हैं।

स्थानीय जॉब कार्डधारी मजदूरों से सीमेंट, कंकरीट आदि से पेवर सड़क निर्माण का काम करवाया जाना था। फिलहाल सरपंच ग्रामसेवक ने मिलीभगत कर काम आंतरोली गांव निवासी हमीद मोहम्मद को ठेके पर दे दिया। उसने कोटा बारां के पंद्रह मजदूरों को काम पर लगाया है। नरेगा के इस कार्यस्थल पर तो कोई मेट था और ही स्थानीय मजदूर।

यहांतो ऐसे ही काम करवाने पड़ते हैं

^मुझेसड़क के एस्टीमेट का पता नहीं है, ग्रामसेवक ही बता पाएंगे। नरेगा में काम करने के लिए मजदूर कहां आते हैं। यहां तो ऐसे ही काम करवाने पड़ते हैं। बाहरी मजदूरों के बारे में कुछ नहीं कह सकता। सुखदेवाराम,सरपंच, धानणवा

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