प्रवचन से होती है भावों की शुद्धि
अलवर | जैनसंत उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि महाराज ने कहा कि जीवन में नैतिकता, सदाचार आध्यात्म के लिए स्वाध्याय जरूरी है। धर्म को जानने के दो मार्ग हैं। स्वाध्याय प्रवचन सुनना। वे रविवार को महावीर भवन में धर्मसभा में बोल रहे थे। जैन मुनि ने कहा कि संयमी त्यागी संतों से सुने गए प्रवचन जीवन की दिशा बदलने में सहायक होते हैं। इंसान बिना ज्ञान के धर्म जीवन में नहीं उतर पाता है। ज्ञान, प्रवचन, स्वाध्याय, ग्रंथ, शास्त्र के अध्ययन से मिलता है। उन्होंने कहा कि स्वाध्याय तप है। इससे कर्मों की निर्जरा होती है। आध्यात्म का ज्ञान भव सागर से पार लगाने में सक्षम है। स्वाध्याय प्रवचन सुनने से भावों की शुद्धि होती है। ऋषि मुनि महाराज ने अपने उद्धबोधन में धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि धर्म अनुभव की चीज है, जिसे मानवीय बनाने पर संप्रदाय बन जाता है। धर्म को मंगल उत्कृष्ट कहा जाता है। जो इंसान को महान बनाने में सक्षम है। साध्वी मंजुल ज्योति ने कहा कि विनय को अपनाने वाला व्यक्ति महान होता है। बिना विनय गुण के इंसान का जीवन नीरस है। इस मौके पर बालिका जिया खुशी ने हे गुरुवर मेरे सिर पर रख दो दोनों हाथ... भजन की प्रस्तुति दी। संचालन महेंद्र सचेती ने किया।
आजविहार करेंगे जैन संत : श्वेतांबरस्थानकवासी जैन संतों का दल सोमवार सुबह 8.30 बजे महावीर भवन से मालाखेड़ा के लिए विहार करेगा। साध्वियों का दल मंगलवार को विहार करेगा।
आजप्रवचन : श्वेतांबरस्थानकवासी जैन साध्वियों के प्रवचन सोमवार सुबह 9 बजे महावीर भवन में होंगे।
दोवैरागी युवकों का अभिनंदन : श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन संघ महिला मंडल की ओर से महावीर भवन में वैरागी हिंडौन निवासी रविश जैन अलवर के मौजपुर गांव निवासी ओमप्रकाश का अभिनंदन किया गया। ये दोनों वैरागी अगले माह जनवरी में आचार्य हीराचंद से दीक्षा लेंगे।