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दबंगों ने सरकारी जोहड़ का ठेका छोड़ा

7 वर्ष पहले
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बड़ेरगांव में कुछ दबंग लोगों ने सरकारी जमीन पर बने जोहड़ का ठेका सिंगाड़े की फसल लगाने के लिए निजी व्यक्ति को छोड़ दिया है। इससे गांव में पशुओं के लिए पीने के पानी का संकट पैदा हो गया। ग्रामीणों की शिकायत पर एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों के अनुसार गांव के कुछ लोगों ने सरकारी जोहड़ को ग्राम पंचायत प्रशासन की स्वीकृति के बिना सिंगाडे की फसल लगाने के लिए ठेके पर दे दिया। फसल पैदा करने के लिए जोहड़ के पानी में कीटनाशक दवा डाली जाती है। इस पानी का उपयोग करने से पशुओं में बीमारी फैलने का अंदेशा बना हुआ है।

कार्रवाईनहीं तो उग्र आंदोलन

ग्रामीणोंने तालाब को ठेकेदार से मुक्त कराने सिंगाडे की बेल हटाने का लेकर तहसीलदार से 13 अगस्त को मेजरनामा सौंपा था। मामले को लेकर ग्राम पंचायत भी शिकायत कर चुकी है। मामले में अब तक कार्रवाई नहीं होने से लोग नाराज हैं और उग्र आंदोलन को लेकर रणनीति बना रहे हैं।

तीनसाल पहले भी छोड़ दिया था मछली ठेका

सरपंचनिहाली देवी ने बताया कि गांव के दबंग लोगों ने करीब तीन साल पहले इसी जोहड़ में मछलियों का ठेका छोड़ दिया था। मछलियों के लिए जोहड़ के पानी में मांस दाना डाला गया। इससे जोहड़ का पानी दूषित हो गया। कुछ समय बाद मछलियां भी मर गई। ग्रामीणों के विरोध के बाद जोहड़ से मछलियों को निकाला गया। इस बार भी करीब 16 हजार रुपए में ठेका छोड़ा गया है।

मालाखेड़ा. बड़ेर गांव के इस जोहड़ में डाली गई है िसंगाड़े की बेल।