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फर्जी तरीके से नौकरी के मामले में जांच के आदेश

4 वर्ष पहले
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मालाखेड़ा थाना पुलिस ने जांच के बाद लगा दी थी अंतिम रिपोर्ट

अलवर|नामबदलकर आंगनबाड़ी सहायिका पद पर नौकरी करने के मामले में अदालत ने मालाखेड़ा थाना पुलिस की ओर से पेश अंतिम रिपोर्ट को नामंजूर करते हुए दो बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट अदालत में पेश करने के आदेश दिए हैं।

प्रकरण के अनुसार मालाखेड़ा क्षेत्र के लीली गांव निवासी बनवारीलाल शर्मा ने इस्तगासे के जरिए 2016 में मालाखेड़ा थाने में मुकदमा दर्ज कराया कि उसका और उसके छोटे भाई ओमप्रकाश का 1984 में बड़गांव नैथला निवासी दो सगी बहनों क्रमश: आशा देवी और गीता पुत्री लक्ष्मीनारायण के साथ हुआ था। आशादेवी लीली गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर कार्यरत थी। बाद में 17 जनवरी 1993 को उसकी प|ी आशा देवी की मृत्यु हो गई। इसके बाद बनवारीलाल शर्मा जयपुर में रहकर फोटोग्राफी करने लगा। इस दौरान उसके छोटे भाई ओमप्रकाश की प|ी गीता देवी ने नाम बदलकर आशादेवी के नाम से लीली गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में आंगनबाड़ी सहायिका के रूप में कार्य करने लगी।

इस पर मालाखेड़ा पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच की। जांच के बाद पुलिस ने परिवादी बनवारी की प|ी का नाम आशा नहीं अशोक था, यह बताकर मामले में एफआर लगा दी। इस पर बनवारी ने अदालत में प्रोटेस्ट प्रार्थनापत्र पेश किया और अदालत में खुद के बयान दर्ज कराए। प्रकरण में बनवारी के वकील ने अदालत में बहस कर पत्रावली पुन: जांच के लिए थाने को भेजने का आग्रह किया। मालाखेड़ा के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बनवारी की ओर से पेश दस्तावेजाें के आधार पर मालाखेड़ा थानाधिकारी को इसी 30 जून को दो बिंदुओं पर मामले की जांच के आदेश दिए। पहला बिंदु-क्या बनवारी की प|ी का नाम आशादेवी था और वह आंगनबाड़ी केंद्र लीली में मृत्यु से पूर्व कार्य करती थी। दूसरा बिंदु-क्या आेमप्रकाश की प|ी गीता ने फर्जकारी से श्रीमती आशादेवी बनते हुए आंगनबाड़ी केंद्र लीली से वेतन-भत्ते आदि का भुगतान आदि का भुगतान प्राप्त किया है।

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