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4 प्रांतों के पहलवान, कुश्ती में बराबरी

5 वर्ष पहले
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मालाखेड़ा. हल्दीना में बाबा रामदेव का मेला बुधवार को भरा। इस अवसर पर अायोजित कुश्ती दंगल में कई प्रांतों के पहलवान जोर आजमाइश करने आए। दंगल में उमड़े ग्रामीण दांवपेंच आजमाते पहलवान।

मालाखेड़ा| हल्दीनामें स्थित बाबा रामदेव के मंदिर पर बुधवार को मेला कुश्ती दंगल का आयोजन हुआ। मेले में हल्दीना सहित आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों ने बाबा के दरबार में प्रसाद चढ़ाकर मत्था टेककर मन्नत मांगी। कुश्ती दंगल में अलवर, भरतपुर, दिल्ली, यूपी हरियाणा के नामी पहलवानों का जमावड़ा रहता है। मेला कुश्ती दंगल के बाद रात्री को राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में मथुरा की नौटंकी हुई जो संपूर्ण रात्री तक चली।

कुश्तीमें हुए रोमांचक मुकाबले

मेलेमें 51 हजार रुपए की कुश्ती का कामड़ा बराबरी पर छूटा। ऊटावर के नासीर अलवर के मोनू पहलवान के बीच मुकाबला हुआ जो बराबरी पर छूटा। कामड़े की कुश्ती पूर्व प्रधान शिवलाल गुर्जर बांबोली सरपंच वीरसिंह चौधरी ने दोनों पहलवानों का हाथ मिलाकर शुरू करवाई।

एकरात में बना था मंदिर

रामदेवका मंदिर एक रात में बनने की किवदंती है। इसके अनुसार लखी बंजारा एक बार गायों पर मिश्री लादकर ले जा रहे थे। रात्रि में उन्हें रास्ते में रामदेव मिले और बंजारे से पूछा कि गायों पर क्या लाद रखा है। लखी बंजारे ने झूठ बोलकर नमक बताया। इस पर मिश्री नमक बन गई। लखी बंजारे को अपने झूठ पर पछतावा हुआ। इसके बाद बाबा रामदेव ने उसे एक रात में मंदिर बनाने के आदेश दिए। बंजारे ने रातभर में मंदिर बनाया और गायों पर लदा नमक फिर से मिश्री बन गया।

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