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तीस हजार सफाई कर्मचारियों की भर्ती का रास्ता साफ

5 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता| सवाई माधोपुर

राजस्थानमें 30 हजार सफाई कर्मचारियों की भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। पहले यह भर्ती प्रक्रिया साढ़े तीन साल से अटकी हुई थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई करते हुए अब इस भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र करने के आदेश राज्य सरकार को दिए हैं।

स्वायत्त शासन विभाग द्वारा विज्ञापन संख्या 1/2012 द्वारा पूरे राजस्थान में 11,376 पदों पर नगर निगम एवं नगरपालिकाओं में सफाई कर्मचारियों के लिए आवेदन मांगे गए थे, जिसमें याचिका कर्ताओं द्वारा नगर निगम एवं नगरपरिषद सवाई माधोपुर, कोटा, जयपुर, रावतभाटा आदि में आवेदन किया गया। कुछ जगह याचिकाकर्ताओं के साक्षात्कार भी ले लिए गए थे, लेकिन स्वायत्त शासन विभाग द्वारा 3 मई 2013 को भर्ती नियमों में संशोधन करते हुए पदों की संख्या तीस हजार कर दी गई, लेकिन बाद में शर्त संख्या 13 के कारण याचिकाकर्ताओं की अभ्यर्थिता एक वर्ष बाद रद्द कर दी गई।

क्याथी शर्त संख्या 13 : चयनप्रक्रिया कुल तीस हजार पदों पर की जानी थी लेकिन प्रथम चरण में सामान्य एवं अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों के 20 हजार पदों पर भर्ती किया जाना निर्धारित हुआ। इन दोनों वर्गों के पदों (66 प्रतिशत) के विरुद्ध परंपरागत सफाई कार्य जिसमें रोड स्वीपिंग, सीवरेज, सफाई, नाला- नाली सफाई, कचरा संग्रहण एवं परिवहन तथा मृत पशुओं के निस्तारण आदि से जुड़े परिवारों के अभ्यर्थियों जैसे वाल्मीकि एवं हेला समाज के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दिया जाना निर्धारित था। शेष 10 हजार पदों पर अन्य वर्गों (ओबीसी, एसटी) की भर्ती द्वितीय चरण में किया जाना निर्धारित था।

इसलिए लटका मामला

एडवोकेटरमाकांत गौतम ने बताया कि याचिकाकर्ताओं के आवेदन स्वीकार कर भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के आदेश देते हुए स्वायत्त शासन विभाग के द्वारा इस प्रकार की शर्त अधिरोपित करने के कारण भर्ती प्रक्रिया साढ़े तीन साल तक अटकी रही। इसके लिए न्यायालय ने प्रत्येक याचिका कर्ता को दो दो हजार रुपए हर्जाना दिए जाने के विभाग को आदेश दिए हैं।

भर्ती शीघ्र करने के दिए आदेश

उच्चन्यायालय के एडवोकेट रमाकांत गौतम ने बताया कि मलारना डूंगर निवासी याचिकाकर्ता रूपसिंह गुर्जर, भजनलाल सैनी एवं विमला देवी सैनी आदि लगभग अठारह याचिकाकर्ताओं के आवेदन प्रथम चरण में ओबीसी का अभ्यर्थी होने के कारण रद्द कर दिए गए थे। इसे चुनौती देते हुए याचिका कर्ताओं के सवाई माधोपुर निवासी अधिवक्ता गौतम ने न्यायालय से आग्रह किया कि इस प्रकार शर्त संविधान के अनुच्छेद 16(2)का उल्लंघन है एवं किसी जाति विशेष को प्राथमिकता देना आरक्षण नियमों का उल्लंघन है। इस पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एम.एन. भंडारी ने शर्त संख्या 13 को समाप्त करते हुए आरक्षण के प्रावधानों के अंतर्गत भर्ती प्रक्रिया पूर्ण एवं शीघ्र करने के आदेश दिए।

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