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बहुप्रजता वाले मेढ़े उपयोगिता जांचने के लिए भेड़ पालकों को वितरित

7 वर्ष पहले
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मालपुरा | केंद्रीयभेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर के वैज्ञानिकों के सोलह साल से किए जा रहे अनुसंधान का परिणाम अब परिणित होने लगा है। सोलह साल के अनुसंधान में विकसित एक साथ दो या दो अधिक मेमने पैदा करने वाले बहुप्रजता मेढ़ों को भेड़ पालकों के रेवड़ में उसकी उपयोगिता जांचने के लिए मंगलवार को वितरण किया गया। किसान सहभागिता कार्यक्रम के तहत किसान गोष्ठी मेढ़ा वितरण समारोह मंगलवार को अविका नगर संस्थान में किया गया। समारोह में नव शोधित तकनीक को प्रचारित कर भेड़ पालकों को उन्नत नस्ल के मेढ़ों की उपयोगिता की जानकारी दी गई। समारोह के मुख्य अतिथि एसडीएम देवाराम सुथार ने किसानों से कहा कि वे अविकानगर के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार उन्नत नस्ल के मेढ़ों से रेवड़ विकसित करें जिससे एक साथ दो या अधिक मेमने पैदा हो सकें। उन्होंने चरागाह पर किए जा रहे अतिक्रमण को ग्रामीणों किसानों के सहयोग से हटाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि मालपुरा तहसील के 170 गांव हैं और सभी गांवों के चरागाहों पर अतिक्रमण कर लिया गया है। सरकार या प्रशासन ग्रामीणों के सहयोग के बिना उन्हें मुक्त नहीं करा सकता है।

निदेशक डॉ. एस.एम.के. नकवी ने कहा कि सोलह साल में वैज्ञानिकों ने मेंढ़े की ऐसी प्रजाति तैयार की है जिसके संपर्क से भेड़ एक साथ दो या अधिक बच्चे पैदा कर सकेगी। उन्होंने इस प्रजाति के मेंढ़े को देश का प्रथम उन्नत मेढ़ा बताया। उन्होंने कहा कि उन्नत नस्ल का तैयार यह मेढ़ा अंतिम रिसर्च के लिए भेड़ पालकों को वितरित किया जा रहा है जिससे यह रेवड़ में अपना करतब दिखा सके। उन्होंने बताया कि डीएनए टेक्नोलॉजी के आधार पर मालपुरा नस्ल की भेड़ पर शोध किया गया जो सफल रहा। उन्होंने बताया कि इस उन्नत नस्ल के मेढ़ों को 4 जनवरी 2016 को भेड़ पालकों के लिए सार्वजनिक रूप दे दिया जाएगा। उक्त मेढ़ा वितरण करने का मुख्य उद्देश्य भेड़ पालकों के रेवड़ में प्रयोग कर अंतिम रिपोर्ट प्राप्त करना है।

इस अवसर पर परियोजना मुख्य वैज्ञानिक अन्वेषक डॉ. आर.सी. शर्मा ने परियोजना की जानकारी दी। डॉ. ए.के. साहू, डॉ. राजीव गुल्यानी, डॉ. सुरेश चंद शर्मा ने भी अपने विभागों की जानकारी दी। डॉ. अरुण कुमार तोमर ने कहा कि पंजीकृत पशुपालकों को उन्नत मेंढ़े परीक्षण के लिए वितरित किए गए हैं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एसडीएम देवाराम सुथार निदेशक डॉ. एस.एम.के.