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शुरू होने से पहले अनुपयोगी हो गया नवीन स्कूल भवन

7 वर्ष पहले
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ग्रामपंचायत नगर में रैगरों की ढाणी में नव-निर्मित भवन समानीकरण की भेंट चढ़ जाने से एक दिन भी उपयोग में नहीं सका, जिससे ढाणी के लोगों में आक्रोश है।

दलित बस्ती के वार्डपंच आशाराम, सीताराम, बनवारीलाल, राकेश, ताराचंद, नाथूलाल आदि लोगों ने बताया कि सरकारी अमले ने इनकी बस्ती में स्कूल को समानीकरण के बहाने सीनियर स्कूल में मर्ज कर दिया, जबकि इस ढाणी से दूरी एक किलोमीटर से भी अधिक है। सरकार ने एक किलोमीटर की परिधि में अनार्थिक स्कूलों को नजदीकी सीनियर स्कूल में मर्ज करने के आदेश दिए थे, परन्तु दलित बस्ती के इन लोगों के इस प्राथमिक स्कूल को मर्ज कर दिया। इस स्कूल में 25 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत थे। दलित बस्ती के लोगों ने स्कूल को यथावत रखने के लिए उपखंड अधिकारी मालपुरा को 27 अक्टूबर को ज्ञापन देकर बताया था कि ढाणी के लोगों ने जन सहयोग से भूमि क्रय कर भवन निर्माण के लिए विभाग को दी थी। जिस पर विभाग ने लगभग 16 लाख रुपए खर्च कर भवन बनाया था। तीन कमरों रसोई घर के निर्माण के अलावा बरामदे का भी निर्माण हुआ है। भवन का तो लोकार्पण हो सका और ही छात्र-छात्राओं को एक दिन भी इस नव-निर्मित भवन में बैठने का अवसर ही मिल पाया। इससे पूर्व ही सरकारी फरमान जारी हो जाने से इस भवन को समानीकरण की भेंट चढ़ाते हुए विभाग ने गांव के सीनियर स्कूल में मर्ज कर दिया है। जिसके चलते छोटे-छोटे बच्चों को एक किलोमीटर से भी अधिक दूरी जा कर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

इस बारे में ब्लॉक शिक्षाधिकारी रामगोपाल जाट का कहना है कि राज्य सरकार के आदेशानुसार जिन स्कूलों में पचास से कम छात्र संख्या थी तथा जिनकी दूरी नजदीकी सीनियर स्कूल से एक किलोमीटर से कम थी, उन सभी स्कूलों को मर्ज किया गया है। यह नियम नगर गांव के रैगरों की ढाणी पर भी लागू होता है।

पचेवर . एकदिन भी उपयोग मे नहीं आया ढाणी रैगरान नगर का नव-निर्मित स्कूल भवन।