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कमरों का अभाव, बरामदे में बैठने को मजबूर छात्र

6 वर्ष पहले
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ग्राम पंचायत पादर में संचालित राजकीय माध्यमिक स्कूल में छात्र-छात्राओं को हो रही परेशानी

परेशानी

समीपवर्ती ग्राम पंचायत पादर में संचालित राजकीय माध्यमिक स्कूल में एकीकरण के तहत मर्ज की गई स्कूल से बढ़ी छात्रों की संख्या के कारण स्कूल में कमरे कम पड़ रहे हैं। इस कारण छात्रों को बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। साथ ही कई छात्रों को तो पोषाहार कक्ष में बैठाकर अध्ययन करवाया जा रहा है। पादर गांव में एक मात्र सरकारी स्कूल को सरकार की ओर से उच्च प्राथमिक स्कूल से माध्यमिक स्कूल में दो साल पहले क्रमोन्नत किया गया था, लेकिन स्कूल के पास केवल चार कमरे होने के कारण एक साथ सभी छात्रों को इन चार कमरों में बैठाना मुश्किल हो रहा है। इस कारण स्कूल के अधिकतर छात्र-छात्राएं रोजाना बरामदे में बैठकर अध्ययन करने को मजबूर है। स्कूल में छात्र रमेश कुमार, पारसाराम, मोतीराम, कालूराम, कुमारी रमीला सविता समेत कई छात्र-छात्राओं ने बताया कि स्कूल में केवल चार कमरे होने के कारण जगह कम पड़ती है। इस कारण कक्षा एक से पांच तक के छात्रों को कमरों में बैठाया जाता है, जबकि बड़ी कक्षाओं के छात्रों को रोजाना अपने स्तर पर बरामदे की साफ-सफाई कर वहीं पर बैठना पड़ता है।

पांचसाल पहले नाममात्र के थे छात्र

पांचसाल पहले पादर प्राथमिक स्कूल में केवल दस छात्रों का नामांकन था, लेकिन अध्यापक के प्रयास के चलते इस स्कूल में अब छात्रों की संख्या करीब 280 पहुंच गई हैं, लेकिन यहां पर कमरों का अभाव होने के कारण कई छात्रों को मजबूरन अन्य स्कूल में जाना पड़ रहा है। यहां कार्यरत अध्यापक ने बताया कि स्कूल में अध्यापकों की संख्या सात है ओर कक्षाएं एक से दस तक होने के कारण चार कमरों में सभी छात्रों को बैठाना मुश्किल होता है।

कई बार भेजा है प्रस्ताव

पादरगांव के दलपतसिंह, गुलाबसिंह, राजूसिंह देवी सिंह ने बताया कि हमारे गांव में सरकारी स्कूल में कमरों का अभाव होने के कारण छात्र-छात्राओं को सर्दी, गर्मी, बारिश हर मौसम में मजबूरी में छात्रों को बरामदे में ही बैठना पड़ता है। कमरों के निर्माण के लिए कई बार ग्राम सभा में प्रस्ताव लेकर शिक्षा को भेजा गया, लेकिन आजतक कमरों के लिए बजट स्वीकृत नहीं होने से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।

मंडार. कमरों के अभाव में बरामदे में बैठ कर पढ़ाई करते छात्र-छात्राएं।