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मेनाल के जंगल में दिखे गिद्द

7 वर्ष पहले
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मांडलगढ़. कोटा&चित्तौड़गढ़फोरलेन पर मेनाल के जंगल में बुधवार को दिखा गिद्दों का झुंड।

भास्कर न्यूज | मांडलगढ़

विलुप्तप्राय गिद्दों का झुंड बुधवार को

मेनाल के जंगल में देखा गया। करीब डेढ़ दर्जन इन गिद्दों में भारतीय ग्रिफॉन प्रजाति के गिद्द बताए गए हैं।

कोटा-चित्तौड़गढ़ फोरलेन से सटे जंगल में करीब 20 गिद्द दिखाई दिए। एमएलवी कॉलेज में प्राणी शास्त्र के व्याख्याता डॉ. अनिल त्रिपाठी ने बताया कि आईयूसीएन के अनुसार भारतीय गिद्धों की यह प्रजाति विलुप्ति के कगार पर है। इनमें इंडियन जीवाईपीएस इंडिकस बैंगालेसीस प्रजाति देखने को मिलती है। इनकी उम्र 10 वर्ष तक हो सकती है। यह सीआर श्रेणी में आते हैं। वर्ष 2010-2011 में गिद्धों की संख्या में अचानक कमी आई। अब फिर से गिद्दों में वृद्धि होने लगी है। लंबे समय बाद इतनी संख्या में गिद्ध दिखाई देना अच्छी खबर है।

विलुप्तिका कारण

डॉ.त्रिपाठी बताते हैं कि गिद्दों के विलुप्त होने के पीछे मुख्य कारण जानवरों को दर्द निवारक डाइक्लोफैनिक दवा देना है। ऐसे पशुओं की मौत होने पर गिद्द इनका मांस खाते हैं। इससे इनकी मौत हो जाती है। दूध बढ़ाने के लिए पशुओं में लगाए जाने वाले इंजेक्शन भी गिद्दों की मौत का कारण हो सकता है। ऐसे पशुओं के मांस से भी गिद्दों की मौत हो रही हैं।