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मुझे 5 साल के लिए चुना है, एक साल के लिए नहीं
विपक्ष कहता है- एक साल में कोई काम नहीं हुआ
आपकी सरकार का एक साल पूरा हुआ है। विपक्ष कहता है- सालभर में कुछ नहीं हुआ, हमारी योजनाओं पर चलते तो काम दिख जाता। सच्चाई है या उनका फ्रस्ट्रेशन?
मुझेपांच साल के लिए चुना गया है कि एक साल के लिए। ३६५ दिन में से चुनाव, आचार संहिता, छुट्टियां निकाल दें तो काम के केवल १५१ दिन मिले। और हां, पिछली सरकार ने जो उल्टे-सीधे फैसले किए हैं, मेरे अफसर उन मामलों में कोर्ट के चक्कर ही लगा रहे हैं। ऐसी योजनाओं को क्या आगे बढ़ाते, जिनसे प्रदेश दस साल पीछे चला गया। काम अच्छे थे तो लोगों ने इस कदर क्यों हराया।
चलिए, आपही सरकार का एक ऐसा काम बताइए जिसने लोगों का जीवन बदला या बदलने वाला हो?
एकनहीं, कई हैं। भामाशाह योजना सिर्फ एक कार्ड नहीं है, बल्कि पहचान देता है जिससे खाता तो खुलेगा ही पेंशन, हैल्थ इंश्योरेंस, नरेगा, पीडीएस जैसी योजनाओं का पैसा भी इससे मिलेगा। प्रदेश में तीन लाख करोड़ रु. के निवेश की प्लानिंग भी हमने की है। स्किल डेवलपमेंट लाखों युवाओं को रोजगार देगा।
‘गुड गवर्नेंस’का क्या हुआ? आप तीन संभागों का दौरा कर चुकी है। विपक्षी कहते हैं- सरकार जनता के घर तक गई, पर हुआ कुछ नहीं?
जवाब-देखिए,चीजें ओवर-नाइट नहीं बदला करतीं। तीनों संभागों में मुझे करीब ८० -80 हजार शिकायतें मिलीं। एक तिहाई शिकायतें तो एक ही जैसी हैं। काफी कोर्ट में विचाराधीन हैं। बाकी बची शिकायतों पर काम जारी है। हां, अब कोटा संभाग का दौरा तभी करूंगी जब तीनों संभागों की समस्याएं हल हो जाएंगी।
मंत्रिमंडल विस्तारमें दस महीने की देरी ने चर्चा बटोरी। क्या दिल्ली से कोई दबाव था? कहा यह भी जा रहा था कि आप दिल्ली जाने वाली हैं और आप प्रधानमंत्री मोदी की टीम में विदेशमंत्री बन रही हैं। सच क्या है?
कोईदेरी नहीं हुई है। यह सब मीडिया का किया धरा है। मैं मानती हूं कि ‘लैस गवर्नमेंट, मोर गवर्नेंस’ ज्यादा इफेक्टिव है। मेरे पिछले कार्यकाल में भी मेरी टीम में शुरुआत में मंत्री ही थे। मंत्री कम या ज्यादा होने से जनता के काम नहीं रुकते।
विपक्ष कहतारहा है- २५ सांसदों के बावजूद प्रदेश को मोदी मंत्रिमंडल में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। बने, तो भी राज्यमंत्री ही। ऐसा क्यों?
टीमचुनना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। मैंने भी तो अपनी टीम परखकर ही चुनी है। चलिए छोड़ि