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श्रीजी का किया अभिषेक

7 वर्ष पहले
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भीलवाड़ा. विद्यासागर वाटिका में चल रहे कल्पद्रुम मंडल महा विधान के चौथे दिन रविवार को श्रीजी का अभिषेक किया गया। सुबह 108 इंद्रों ने मुख्य बोली कर्ता महेंद्र कुमार जितेंद्र कुमार सेठी के पीछे दो कतारों में श्रीजी का अभिषेक किया। शांतिधारा के बाद विपिन कुमार सुनील सेठी ने श्रीजी को सिर पर धारण कर समवशरण में विराजमान किया। पुन्यांस भैया के निर्देशन में इंद्रों ने श्रीफल चढ़ाकर ध्वज, कल्पवृक्ष एवं भवन भूमियों में विराजमान जिन मंदिरों में अरिहंत सिद्ध की प्रतिमाओं का पूजन किया। शाम छह बजे चक्रवर्ती शांति लाल शाह की अगुवाई में दिग्विजय यात्रा प्रारंभ हुई। यात्रा में चक्रवर्ती परिवार हाथी पर एवं अन्य मुख्य पात्र रथों में सवार थे। बैंड की धुन तथा जयकारों के साथ यात्रा विद्या सागर वाटिका पहुंची। जहां समवशरण एवं सौभाग्यमति माता की आरती हुई। रात्रि में आदिनाथ जिन मंडल की ओर से नृत्य नाटिका हुई।

बच्चोंमें संस्कारों की आवश्यकता

समवशरणमें विराजमान होकर आर्यिका सौभाग्यमति ने दिव्य देशना में कहा कि बच्चों को राम के समान बनाने के लिए माता-पिता को भी पापों से बचना होगा। बच्चों को भारतीय संस्कृति के संस्कार देने होंगे। आज धन कमाने की अंधी दौड़ में बच्चों को संस्कार देने का समय ही नहीं है। गुरुकुल में प्राप्त संस्कारों से राम ने पिता की आज्ञा मर्यादाओं का पालन किया।