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जिले में रेलवे कंटेनर डिपो के लिए जगह नहीं

7 वर्ष पहले
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रायलाके आसपास रेलवे कंटेनर डिपो बनाने के लिए प्रशासन उद्योग विभाग को जमीन नहीं मिल रही है। कलेक्टर के निर्देश पर उद्योग विभाग ने मांडल, बनेड़ा हुरड़ा तहसीलदार को पत्र लिखकर डिपो के लिए जमीन तलाश करने की बात कही थी। तीनों तहसीलदारों का डीआईसी जीएम शिवराज शर्मा को जवाब आया कि उनके एरिया में रेलवे लाइन के आसपास बिलानाम जमीन नहीं है। रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कॉर्पोरेशन (रिडको) कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (कोनकोर) डिपो बनाने के लिए तैयार है। दो महीने पहले हुई औद्योगिक सलाहकार समिति की मीटिंग में रायला मांडल के बीच डिपो बनाने का निर्णय लिया गया था।

क्याहै योजना

जिलेसे टेक्सटाइल, मिनरल, सैंड स्टोन, सोप स्टोन आदि का लगभग करीब 3,500 करोड़ रुपए का सालाना एक्सपोर्ट होता है। टेक्सटाइल सैंड स्टोन का एक्सपोर्ट कंटेनर से होता है। वर्तमान में यहां रेलवे कंटेनर परिवहन सुविधा नहीं होने से कंटेनर सड़क मार्ग से बंदरगाहों तक भेजे जाते हैं। सड़क मार्ग से बंदरगाह तक माल भेजने पर उद्यमियों को काफी अतिरिक्त खर्चा लगता है।

कितनीचाहिए जमीन

रेलवेलाइन के आसपास डिपो के लिए 1.5 किलोमीटर लंबी और 150 मीटर चौड़ी जमीन चाहिए। लाइन से दूर जमीन होने पर अतिरिक्त रेल लाइन बिछानी पड़ती है।

इसलिएनहीं मिली जमीन

डिपोके लिए एक साथ बड़ी बिलानाम जमीन चाहिए ताकि प्राइवेट जमीन अधिग्रहण नहीं करनी पड़े। बिलानाम जमीन रेलवे को बहुत कम कीमत पर मिल जाएगी। अधिग्रहण करने पर ज्यादा राशि चुकानी पड़ेगी।

अबरीको को भेजा प्रस्ताव

डीआईसीजीएम शर्मा ने बताया कि तीनों तहसीलदारों का जवाब मिलने के बाद रीको के क्षेत्रीय अधिकारी केके कोठारी से जमीन तलाशने के लिए कहा है। बिलानाम जमीन नहीं होने से रीको को जमीन का अधिग्रहण करना पड़ेगा।