फिर बदलेगा बिहार का मांझी
विधानमंडल का नेता चुने जाने के दौरान नीतीश और शरद।
जीतनराम मांझी
भाजपा में हलचल,मांझी दिल्ली रवाना
भाजपामें भी हलचल बढ़ गई है। पार्टी ने हालात भुनाते हुए नीतीश को निशाने पर लिया। पार्टी नेता नंदकिशोर यादव ने कहा कि ‘नीतीश ने महादलित मांझी के साथ अन्याय किया है।’ इस बीच, मांझी देर शाम पटना से दिल्ली रवाना हुए। सूत्रों के अनुसार वह भाजपा से मिल सकते हैं।
उधर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बैठक की। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी दिल्ली में हैं।
राज्यपाल ने स्वीकारी दो मंत्रियों को बर्खास्त करने की सिफारिश
राज्यपालकेसरीनाथ त्रिपाठी ने पीके शाही और ललन सिंह को बर्खास्त करने की सिफारिश मंजूर कर ली। मांझी ने शुक्रवार रात ही दोनों को बर्खास्त करने को कहा था। इससे पहले शरद यादव ने राज्यपाल को खत लिखकर कहा था कि मांझी की सिफारिश मंजूर की जाए, क्योंकि वह अल्पमत हैं।
8 माह, बदली तस्वीर
{तबनीतीश ने लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। पार्टी को लोकसभा की 40 में से सिर्फ 2 सीटें मिली थीं।
{अब मांझी ने विधानसभा भंग करने के लिए प्रस्ताव पेश किया। 29 में से सिर्फ 7 मंत्री ही उनके साथ रहे। नीतीश समर्थक 21 मंत्री विरोध करते हुए बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए।
{तब 20 मई 2014 को मांझी गांव जाने की तैयारी कर रहे थे। अपना कुर्ता और धोती सूटकेस में रख चुके थे कि अचानक उन्हें उसी सूटकेस के साथ सीएम हाउस बुला लिया गया।
{अब 7 फरवरी 2015 को वही सूटकेस इतना भारी हो गया है कि मांझी उसे लेकर किसी भी सूरत में सीएम हाउस से बाहर नहीं निकलना चाहते।
भास्कर न्यूज नेटवर्क | पटना
बिहार की राजनीति में शुरू हुआ महाभारत बेहद रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। पात्र वही हैं, बस उनकी भूमिकाएं बदल गई हैं। अब तस्वीर आठ महीने पहले से ठीक विपरीत है। तब जो जीतनराम नीतीश कुमार के मांझी बने थे, अब वही जीतनराम नीतीश के खिलाफ हैं। और नीतीश विधायक दल के नए नेता। यानी मांझी का मुख्यमंत्री पद से जाना तय है। मांझी ने शनिवार को राज्यपाल से 15 मंत्रियों को बर्खास्त करने की सिफारिश की। लेकिन जेडीयू ने मांझी को नेता पद से ही बर्खास्त कर दिया। नीतीश को जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव के घर हुई बैठक में नया नेता चुना गया। कभी मांझी के साथ रहे अर्जुन मांझी ने ही नीतीश के नाम का प्रस्ताव रखा, जिस पर सबने रजामंदी दी। बैठक में जेडीयू के 111 में से 97 विधायकों और 41 में से 34 विधानपार्षदों ने हिस्सा लिया। सीएम मांझी इस बैठक में नहीं गए और इसे खारिज कर दिया। कहा कि विधायकों की बैठक बुलाने का अधिकार मुख्यमंत्री का होता है, कि पार्टी अध्यक्ष का।
अब20 की बैठक पर नजर
मांझीने 20 फरवरी को विधायकों और विधानपार्षदों की बैठक बुलाई है। उन्होंने शुक्रवार को ही एलान कर दिया था कि यदि साथी विधायक कहेंगे तो मैं इस्तीफा दे दूंगा।
इस बीच, कैबिनेट की को-आर्डिनेशन डिपार्टमेंट ने राज्यपाल के संयुक्त सत्र के संबोधन और विधानसभा भंग करने के फैसले के लिए भी मांझी को अधिकृत किया है।