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इसरो के वैज्ञानिक, इसलिए की खुद के 50 लाख रुपए से 110 देशों की यात्रा

7 वर्ष पहले
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अंतरिक्षकोपास से देखने का सपना सुरेश स्कूल से देखते आए थे। 1978 में इसरो में आने के बाद 1985 में उनका यह सपना पूरा भी होने वाला था। इसरो ने अंतरिक्ष में जाने वाले चार सदस्यीय दल में उन्हें भी शामिल किया था। लेकिन, फरवरी 1986 में अंतरिक्ष यान चैलेंजर में विस्फोट हो जाने से यह अभियान रद्द हो गया। सुरेश के लिए यह हादसा किसी बड़े सदमे से कम नहीं था। लेकिन यह घटना उन्हें नया लक्ष्य दे गई। उन्होंने दुनिया के सातों महाद्वीप की यात्रा करने का निर्णय लिया। इसकी तैयारी में उन्हें 11 साल लग गए। इस दौरान फिजूलखर्ची बंद कर दी। हासन में सरकारी आवास मिला था, इसलिए रहने पर भी कुछ खर्च नहीं होता था। उनकी पूरी दुनिया घर से ऑफिस और ऑफिस से घर के बीच सिमट रह गई थी। दोनों पति-प|ी हर साल मिलने वाली 30 िदन की अर्न लीव भी बचाते थे।

1997 में उन्होंने प|ी और बेटी के साथ सुदूर-पूर्व देशाें की पहली यात्रा प्लान की। ट्रेवल एजेंट से बुकिंग कराई। सबसे पहले थाईलैंड गए। इसके एक माह तक हांगकांग, मलेशिया और अन्य देश घूमे। पूरी यात्रा में हवाई किराया के अलावा एक लाख रुपए खर्च हुए। इस यात्रा ने उन्हें दो सबक दिए। पहला- सालभर पैसे बचाओ और एक माह घूमने पर खर्च करो। दूसरा- कम खर्चे पर यात्रा का आनंद लेने के लिए ट्रेवल एजेंट से बचो। इसके बाद उन्होंने आगे की यात्राओं के लिए सस्ती पड़ने वाली नाइट फ्लाइट्स और मिड वीक फ्लाइट्स में खुद ही टिकट बुक कराईं। पैसे बचाने के लिए डायरेक्ट फ्लाइट के बजाए लंबे रूट को प्राथमिकता दी। सस्ते गेस्ट हाउस और सर्विस अपार्टमेंट में रुकते। शाकाहारी हैं, इसलिए रेडी टू ईट फूड रखते। जिस देश में जाते ट्रेन और बस से यात्रा करते। सबसे सस्ती लॉज में रुकते। खाने पर कम खर्च करने के लिए रेडी टू ईट फूड खाते। ट्रांसपोर्ट के लिए सबसे सस्ते साधन का उपयोग करते। शॉपिंग से बचते। ऐसे करके कम खर्चे पर ज्यादा से ज्यादा यात्रा का आनंद उठाते। इस तरह उन्होंने मात्र 50 लाख रुपए खर्च कर अब तक 110 से भी ज्यादा देशों की यात्रा की। प|ी 87 देशों की यात्रा में और बेटी 41 देशों में उनके साथ थी। सुरेश का कहना है कि स्ट्रेटोस्फेयर तक जाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके लिए पैसे के साथ फिटनेस, जोश, कम्युनिकेशन स्किल बहुत जरूरी है। वे अब भारहीनता का अनुभव करने के लिए जीरो-जी फ्लाइट पर जाने वाले हैं।