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संतोष जीवन का सार

7 वर्ष पहले
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{वृदांवन धाम में भागवत कथा में बोले आचार्य राजाराम महाराज

भास्करन्यूज | भीलवाड़ा

चित्रकूटधाम उत्तरप्रदेश के आचार्य राजाराम महाराज ने कहा कि संतोष ही जीवन का सार है और यही सबसे बड़ा सुख है। संतोषी व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है। उसकी सभी जिम्मेदारियां निश्चित समय पर पूरी होती है।

यह बात उन्होंने रविवार को आजादनगर में कुंभा सर्किल स्थित वृंदावन धाम में श्रीमद भागवत प्रचार सेवा समिति एवं राधा रानी महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में भागवत कथा में पांचवे दिन कही। उन्होंने कहा कि संतोषी व्यक्ति के मन में अकारण इच्छा उत्पन्न नहीं होती है। अगर इच्छा उत्पन्न होती भी है तो वह उसे नियंत्रित कर लेता है। परिश्रमी व्यक्ति का भाग्य भी साथ देता है। कथा के दौरान आचार्य ने श्रीकृष्ण जन्म के बाद नंद बाबा द्वारा बांटी जाने वाली बधाइयां, गोपियों का श्रीकृष्ण को देखने के बहाने बधाई लेने आना, नंद बाबा द्वारा खुशी-खुशी गोपियों को बधाई देकर लौटाना, बालकृष्ण द्वारा राक्षसी पूतना का वध करना आदि प्रसंगों का वर्णन कर श्रोताओं को आनंदित किया।

कथा के दौरान गोवर्धन पर्वत छप्पनभोग की झांकी सजाई गई। कोटा के सिराज भाई ने भजन जन्मे कृष्ण लला, यशोदा मैया दे दो बधाई...प्रस्तुत किया। कथा के बाद छप्पनभोग का प्रसाद बांटा गया। प्रवक्ता कुलदीप शास्त्री ने बताया कि सोमवार शाम चार बजे श्रीकृष्ण-रुक्मणि विवाह का आयोजन होगा। कथा रोज दोपहर एक से शाम पांच बजे तक हो रही है।