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बजने लगे चंग, खिलने शुरू हुए होली के रंग

6 वर्ष पहले
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भीलवाड़ा। लोकसंस्कृति का एक रंग है चंग वादन। चंग की थाप सुनकर श्रोताओं के कदम अनायास ही नाचने के लिए उठने लग जाते हैं। फाल्गुन माह शुरू होने के साथ ही शहर में भी चंग की थाप होली के गीत गूंजने लगे है। जगह-जगह फाग गीतों से सराबोर युवा होली पर्व के आने का संदेश दे रहे हैं। चंग की थाप के साथ फागुनी गीतों की धुन उमंग भर देती है।
इस दौरान गाए जाने वाले होली गीतों में \\'राजा बल के दरबार मची रे होली... \\', एक तो संदेशो म्हारा रणत भंवर ने दीज्यो रे...., तथा \\'और रंग दे रे म्हारा और रंग दे... का गायन विशेष है।

श्रीराम मंडल सेवा संस्थान के सदस्य वैसे तो साल भर संगीतमय सुंदरकांड पाठ करते हैं लेकिन फाल्गुन माह में इसका अंदाज ही अलग नजर आता है। इस दौरान चंग की थाप का विशेष आकर्षण होता है। श्रीराम मंडल सेवा संस्थान के अध्यक्ष शांति प्रकाश मोहता ने बताया कि फाल्गुन माह में आने वाले हर शनिवार को चंग की थाप पर सुंदरकांड पाठ का आनंद ही और कुछ होता है। इस दौरान सुंदरकांड पाठ आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।