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गेणोली बांध में रिसाव से दूसरी पिलाई पर संशय
दोसाल तक गेणोली बांध की नहरों की देखरेख करने वाले रामेश्वर माली का कहना है कि इस बार एक माह से नहरें चल रही हैं। जबकि हर साल पहली पिलाई 17 दिन में पूरी हो जाती है। इससे दूसरी पिलाई के लिए 15 दिन तक नहरों में पानी छोड़ा जाता है। इस बार ज्यादा समय तक नहरें चालू रहने से बांध में पानी कम बचा है। अब दूसरी पिलाई को लेकर संशय है।
बांध की दीवार में छेद, टेल तक नहीं पहुंचा पानी
गेणोलीके किसान राधेश्याम सेन ने बताया कि सिंचाई के लिए 10 नवंबर से नहरें खोली गई। पहली सिंचाई का टाइम पूरा हो गया लेकिन टेल तक पानी नहीं पहुंचा। नहरें बंद करने के लिए भी कोई तैनात नहीं है। वहीं बांध की दीवार में छेद होने से इस एरिया का पानी बह गया।
गेणोली बांध से रेलणी का पानी छोड़ने के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। बांध से खेतों की सिंचाई के लिए पानी कब तक छोड़ा जाना है और रिसाव होने के बारे में जानकारी लेकर ही कुछ बता पाऊंगा। कोशिश करेंगे कि किसानों को पानी मिले। दूसरी पिलाई का पानी देने के संबंध में चर्चा की जाएगी।
प्रेमचंदसोनी, सचिवगेणोली
{नहरें टूटी कच्ची होने से टेल तक नहीं पहुंच रहा पानी
भास्करन्यूज| मांडलगढ़
गेणोलीबांध से पहली पिलाई पूरी होने से पहले ही पानी जवाब देने लगा है। नहरें टूटी कच्ची होने से पानी टेल तक नहीं पहुंच पाया है। बांध में रिसाव होने से दूसरी पिलाई को लेकर संशय है। साढ़े चार मीटर की भराव क्षमता वाले बांध में अब मात्र डेढ़ मीटर पानी बचा है।
गेणोली बांध से एक हजार बीघा भूमि में सिंचाई होती है। एक माह से नहरों में पानी चल रहा है। पानी टेल तक पहुंच रहा है या नहीं एवं पानी चोरी करने वालों पर निगरानी के लिए यहां कोई तैनात नहीं है। इसका खामियाजा टेल के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। सिंचाई विभाग का यह बांध 10 साल पहले ग्राम पंचायत गेणोली के अधीन कर दिया गया था। पंचायत प्रशासन ने इसकी सुध लेना बंद कर दिया। बांध की दो नहरों से पानी छोड़ा जाता है। नहरें क्षतिग्रस्त होने से पहली पिलाई का पानी किसानों को नसीब नहीं हो पाया। वहीं बांध से निरंतर रिसाव के कारण अब दूसरी पिलाई पर संशय है।
नहरके पानी की देखरेख करने वाला कर्मचारी नहीं रहा है। जिन किसानों ने दो बार पिलाई कर ली है उन पर जुर्माना कर अगली पिलाई का पानी नहीं देंगे। कच्ची नहरों को पक्की बनाने के लिए पंचायत के मा