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एक बाबू के भरोसे कोटड़ी का उपखंड कार्यालय
फसलों को नीलगायों से बचाने के लिए क्षेत्र के किसानों ने बंदूकों का लाइसेंस ले रखा है। बंदूक से हवा में फायर कर किसान नीलगायों को भगाते हैं। हर तीन साल में बंदूक के लाइसेंस नवीनीकरण के लिए पुलिस थाना, तहसीलदार तथा पटवारी की सिफारिश के बाद उपखंड अधिकारी के पास पहुंचते हैं। उनके आदेश पर नवीनीकरण होता है। डेढ़ साल से एसडीएम का पद खाली होने से कई किसानों की बंदूकें थाने के मालखाने में पड़ी हैं।
बीपीएल में चयन के लिए ग्रामीणों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों को चयनित सूची में नाम दर्ज कराने के लिए रोजाना एसडीएम ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उपखंड अधिकारी के निर्णय पर ही मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीपीएल में किसी परिवार का चयन करते हैं। इसके बाद उन्हें कार्ड जारी किया जाता है। उपखंड अधिकारी नहीं होने से ग्रामीण परेशान हैं। बीपीएल में चयन के लिए ग्रामीणों को मांडलगढ़ जाना पड़ता है।
18 नवंबर 2010 को यहां उत्तम सिंह शेखावत को एसडीएम लगाया गया। वे 4 जुलाई 2011 तक रहे। फिर राजेन्द्र दत्त शर्मा 11 अगस्त 2011 से 31 मार्च 2012, गोपाल सिंह शेखावत 1 अप्रैल 2012 से 7 सितंबर 2012, अनुपमा टेलर 10 अक्टूबर 2012 से 5 दिसंबर 2012, लालचंद पारीक 5 दिसंबर से 24 अगस्त 2013 रहे। तहसीलदार विश्वंभरदयाल शर्मा, बिजौलिया एसडीएम गोपाल सिंह शेखावत तहसीलदार गिरधारी लाल कार्यवाहक एसडीएम रहे।
मालखाने में बंदूकें
बीपीएल में चयन नहीं
3 साल में 5 एसडीएम
भास्कर न्यूज | कोटड़ी
डेढ़साल से उपखंड अधिकारी का पद खाली है। मांडलगढ़ एसडीएम हरिताभ आदित्य को अतिरिक्त चार्ज दे रखा है। कोटड़ी से मांडलगढ़ की दूरी करीब 55 किलोमीटर होने से एसडीएम यहां नहीं पाते हैं। उपखंड कार्यालय एक बाबू के भरोसे चल रहा है। इससे यहां करीब दो हजार से अधिक फाइलें पेंडिंग चल रही हैं। राज्य सरकार ने 18 नवंबर 2010 को यहां उपखंड कार्यालय खोलने को मंजूरी दी थी। अब तक यहां पांच एसडीएम लगा दिए गए। स्थिति यह है कि कोई अफसर कुछ माह बाद तबादला करवा लेते हैं तो कोई ज्वाइन करने से पहले अन्यत्र तबादला करवा लेते हैं।
भटकरहे ग्रामीण : एसडीएमका पद खाली है। ग्रामीण ऑफिस आते हैं लेकिन उन्हें केवल एक बाबू दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मिलते हैं। भू रूपांतरण, पत्थरगढ़ी अन्य राजस्व कार्यों के लिए आने वाले ग्रामीण एसडीएम ऑफिस के चक्कर लगा रहे