डीआईजी एसएन खींची को दो साल की कैद
16 साल पुराने मारपीट केस में फैसला
राजसमंद| राजसमंदके तत्कालीन एएसपी और जयपुर के मौजूदा डीआईजी (नागरिक अधिकार) सत्यनारायण खींची को एसीजेएम कोर्ट ने मारपीट के सोलह साल पुराने मामले में सोमवार को दो साल के साधारण कारावास और एक हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। सजा सुनने के बाद कोर्ट में मौजूद खींची मीडिया से बचकर बार भवन के पीछे वाले रास्ते से निकल गए। मामला गरबा नृत्य की स्वीकृति से जुड़ा है।
अभियुक्त खींची ने आयोजन कमेटी से जुड़े तीन लोगों को थाने पर बुलाकर मारपीट की थी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भानुकुमार ने अभियुक्त खींची को धारा 355 के तहत दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई। साथ ही धारा 342 में बरी कर दिया। 16 साल तक चले केस में फरियादी पक्ष के अधिवक्ता सम्पत लड्ढा ने 7 गवाह पेश किए। इसमें मारपीट के शिकार तीनों लोगों और अदालत के आदेश पर मेडिकल बोर्ड में शामिल तीन डॉक्टरों सहित 7 गवाह शामिल थे।
मामला रफा-दफा करने के लिए की थी लाखों की पेशकश: कांकरोली निवासी प्रार्थी रमेश पुत्र शंकरलाल टांक के अनुसार उसने अदालत में इस्तगासा लगाया तो अभियुक्त डीआईजी खींची ने मामला रफा-दफा करने के लिए रमेश सहित तीनों गवाहों को चार-चार लाख देने की पेशकश की थी। लेकिन रमेश ने मामला नहीं उठाया।
यह था मामला: 2 अक्टूबर 2010 को कांकरोली निवासी रमेश पुत्र शंकरलाल टांक अपनी दुकान पर बैठे थे। इस दौरान तत्कालीन एएसपी सत्यनारायण पुत्र कालूराम खींची जीप लेकर पहुंचे। उन्होंने रामदेव मंदिर के सामने गरबा नृत्य की स्वीकृति पर बात करने के लिए आयोजन मंडल से जुड़े प्रार्थी रमेश टांक से राजनगर थाने पर चलने को कहा। इस पर रमेश थाने पर पहुंचा तो वहां पर राजनगर के तत्कालीन थानाधिकारी महमूद खान के ऑफिस में राजनगर निवासी रमेश चपलोत भगवती मादरेचा बैठे थे। थानाधिकारी के ऑफिस में एएसपी खींची ने रमेश का कॉलर पकड़ कर नीचे गिरा दिया और मारपीट की। रमेश चपलोत और भगवती मादरेचा के साथ भी मारपीट की गई। इसके बाद तीनों को शांति भंग के मामले में गिरफ्तार कर एसडीएम के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। 4 अक्टूबर 2010 को तीनों को एसडीएम ने जमानत लेकर रिहा किया। बाद में तीनों राजनगर थाने में एएसपी खींची के खिलाफ मामला दर्ज कराने पहुंचे तो उन्हें धक्के मार कर बाहर निकाल दिया गया। इस पर रमेश ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में खींची के खिलाफ धारा 342 355 में इस्तगासा लगाया था। इसके आधार पर मामला दर्ज किया गया। कोर्ट ने तीन डॉक्टरों की टीम गठित कर रमेश सहित तीनों लोगों का मेडिकल कराया। मेडिकल बोर्ड ने रिपोर्ट में तीनों के साथ बेरहमी से मारपीट होने, शरीर पर जगह-जगह चोटों के निशान बताए गए थे।
एसएन खींची