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मानव को नहीं करना चाहिए अहंकार: शास्त्री
मनियां | कस्बाराधा कृष्ण मंदिर पर आयोजित भागवत कथा में भागवताचार्य पंडित कन्हैया लाल शास्त्री ने कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि सात साल की अवस्था में सात कोस की परिक्रमा देकर गोवर्धन पर्वत को सात दिन तक लगातार गोवर्धन पर्वत को उंगली पर धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की एवं इंद्र के अहंकार का नाश किया। इसलिए मानव को भी जीवन में कभी अहंकार नही करना चाहिए। क्योंकि जीवन एक दो पल का खिलौना है। इसे जितना हो सके प्रभु की भक्ति में लगाना चाहिए। इससे जीवन का उद्धार होता है। इस मौके पर शास्त्री ने पूतना की भी कथा सुनाते हुए कहा कि ठाकुर जी इतने भोले हैं कि एक बार पकड़ लिया तो छोड़ते नहीं हैं। उन्होंने ठाकुर जी के स्वभाव का वर्णन करते हुए कहा कि पूतना मौसी बनकर ठाकुर जी को मारने आई थी, लेकिन जब उसकी जान पर बन आई तो उसने ठाकुर जी से छोडने की गुहार लगाई। इस गुहार को सुनकर महज छह दिन के ठाकुर जी ने कहा कि पूतना मौसी बीच मझधार में नहीं छोड़ सकता। अब तो पार लगाना ही होगा। इस मौके पर महिलाओं ने भजन कीर्तन किया।
मनियां. कथा श्रवण कराते पंडित कन्हैया लाल।