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एकीकरण से बढ़ी परेशानी

7 वर्ष पहले
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जहांराज्य सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नए नए दावे कर रही है। मॉडल स्कूल बनाने की बात कर रही है। वहीं हाल ही में सरकार की ओर से विद्यालयों के एकीकरण की कवायद ही छात्रों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।

आलम यह है कि सरकार की ओर से विद्यालयों का एकीकरण कर उन्हें एक ही विद्यालय में मर्ज तो कर दिया लेकिन जिस विद्यालय में पहिले से ही चल रही कक्षाओं के लिए बैठने के लिए पर्याप्त भवन नहीं हैं। एकीकरण के बाद तो हालात ही बदले हुए हैं। इस तरह से मर्ज हुए विद्यालयों के छात्रों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही वाक्या राजकीय माध्यमिक विद्यालय तोर दानियाल का है। सरकार की ओर से गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय को माध्यमिक के भवन में ही मर्ज कर दिया है। लेकिन उस विद्यालय में पहले से ही भवन की कमी चली रही थी।

ऐसे में प्राथमिक विद्यालय के छात्रों के लिए बैठने के लिए कोई कक्षा कक्ष की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में छात्रों को खुले आसमान के नीचे ही जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। इससे पढ़ाई में व्यवधान हो रहा है। जबकि सरकार की ओर से लाखों रुपए की लागत से हाल ही में प्राथमिक विद्यालय का भवन भी बनाया गया है। जो खाली पड़ा रहता है। अभिभावकों ने बताया कि एकीकरण से सरकार को तो फायदा हुआ होगा लेकिन शिक्षा के स्तर में गिरावट हो रही है। छोटी कक्षाओं के छात्र खुले में पढ़ाई कर रहे जो पढ़ाई के दौरान इधर उधर दूसरी कक्षाओं की ओर ध्यान बनाए रखते हैं। इससे उनका मन भी एकाग्र नहीं हो पा रहा है।

अभिभावकों ने बताया कि आगे अधिक सर्दी के मौसम में शीत लहर चलेंगी जिसमें छात्र खुले में नहीं बैठ सकते हैं। तो पढ़ाई भी कैसे हो सकेगी। इसे लेकर सभी के मन में यही सवाल उठ रहा है कि कैसे होगा शिक्षा का उजियारा। जब सरकार छात्रों को पढ़ने के लिए कक्षा कक्ष की व्यवस्था भी नहीं कर सकती है। ऐसे में शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देने की बात भी बेमानी साबित हो रही है।

डीएम से भी शिकायत

गांवतोर दानियाल के ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर कुमारपाल गौतम को एकीकरण के विरोध में ज्ञापन देकर शिकयत की। शिकायत में कहा गया था कि मर्ज किए गए माध्यमिक विद्यालय के भवन में छात्रों के लिए कक्षा कक्ष की व्यवस्था नही होने से छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वाबजूद भी कोई कार्रवाई नही होने से अभिवावकों में निराश