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एसीडी ने निलंबित सरपंच को माना दोषी

7 वर्ष पहले
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मनोहरपुर| लोचूकाबासगांव निवासी अर्चना शर्मा से कुर्सीनामा बनाने के एवज में रिश्वत मांगने के मामले में एसीडी के उपमहानिदेशक आलोक वशिष्ठ ने निलंबित सरपंच उर्मिला जांगिड़ उसके पति को दोषी मानते हुए संभागीय आयुक्त को पत्र देकर पंचायती राज अधिनियम की धारा 38 के तहत कार्रवाई करने की अनुशंसा की है। कार्रवाई नहीं होने पर बुधवार को ग्रामीणों ने पंचायती राज मंत्री को ज्ञापन देकर निलंबित सरपंच को बर्खास्त करने की मांग की।

अर्चना शर्मा की शिकायत पर एसीडी ने कार्रवाई करते हुए 15 जून 2013 को पंचायत कर्मचारी नाथूलाल शर्मा को कुर्सीनामा बनाकर देने के एवज में 1000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। बाद में उसने तत्कालीन सरपंच उर्मिला जांगिड़ के कहने से रिश्वत लेने की बात स्वीकार की थी। महिला ने इस प्रकरण का मनोहरपुर थाने में मामला दर्ज कराया था। महिला ने मामले से संबंधित ट्रेपिंग दस्तावेज भी एसीडी को उपलब्ध कराए थे। जांच में एसीडी ने सरपंच उर्मिला जांगिड़ को विधिक कर्तव्यों और दायित्वों का समुचित निर्वहन नहींं करने पद का दुरुपयोग करने का दोषी माना। एसीडी ने माना, सरपंच के अधिकारों का दुरुपयोग उसके पति राजेश जांगिड़ कर रहे थे। एसीडी के उपमहानिदेशक ने मामले में 30 जून 2014 को संभागीय आयुक्त को पत्र देकर निलंबित सरपंच के खिलाफ राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1996 के नियम 22 तथा अधिनियम 1994 की धारा 38 के तहत कार्रवाई करने की अनुशंसा की थी। इस मामले में कोई कार्रवाई नही करने से नाराज ग्रामीण सम्पूर्णानंद शर्मा, सुरेश कुमार कुमावत, श्यामलाल, राजकुमार, भारत तेजा रा आदि ने पंचायती राज मंत्री गुलाबचंद कटारिया को ज्ञापन देकर निलंबित सरपंच को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाने पर बर्खास्त करने की मांग की।

हमाराकोई लेना-देना नहीं

निलंबितसरपंच उर्मिला जांगिड़ उसके पति राजेश जांगिड़ का कहना है कि उनका एसीडी के मामले से कोई लेना-देना नहीं है।