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राम के वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण

7 वर्ष पहले
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कस्बेके राउमावि परिसर में चल रही रामलीला के मंचन में राम के वियोग में दशरथ के प्राण त्यागने राम भरत के मिलाप को देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए। रामलीला कमेटी के द्वारा आयोजित की जा रही 49 वीं रामलीला के छठे दिन रविवार की रात आरती के बाद राम को 14 वर्ष वनवास देने के बाद राजा दशरथ इस वियोग को सहन नहीं कर सके और उन्होंने प्राण त्याग दिए। राम के छोटे भाई भरत, शत्रुघन भी वनवास पिता की मृत्यु का सुनकर दुखी हो गए।

भरत ने अपनी माता को पिता से दो वर मांगकर राम को वनवास भेजने भरत का राजतिलक भेजने पर काफी नाराज होकर अपनी माता मंथरा को खरी खोटी सुनाने के दृश्य दिखाए गए। भरत सहित तीनों माताएं, जनक सहित राम से मिलने के लिए वन को जाते है। वहां पर निषादराज, केवट से मिलकर राम तक पहुंचते है। राम भरत के मिलन के दृश्य को देखकर दर्शक भाव विभोर हो गई।

दशरथ का कैलाश शर्मा, केवट का रामप्रसाद ओस्तवाल, राम का नथमल, लक्ष्मण का प्रमोद ने अभिनय किया।

डोडियाना/लाम्पोलाई|करणीमाता मंदिर परिसर में रामलीला का मंचन जारी है। शनिवार रात राम-जन्म, पृथ्वी पुकार, अहिल्या उद्घार, धनुष यज्ञ, रावण बाणासुर लक्ष्मण-परशुराम संवाद प्रस्तुत किया गया।

संचालक राधे दिवाकर ने बताया कि राम की भूमिका में कैलाश व्यास, लक्ष्मण-रामू पानवाला, रावण-राजकुमार दीया, बाणासुर-कैलाश राम, जोकर-बजरंग भाई, जनक-श्रवण राम, सीता-रमेश चन्द्र, सुनेना-रामनिवास ने निभाई।

इस अवसर पर कार्यकारिणी के सदस्यों में घनश्याम भाटी, रतन ठेकेदार, प्रेमाराम गहलोत, लिखमा राम भाटी, कानाराम भाटी,ताराचंद भाटी,उगमाराम दग्दी,बुद्घाराम बावरी सहित ग्रामीण मौजूद थे।

रामके जन्म पर मनाई खुशियां

दयालपुरा|गांवललासरी में नवयुवक मण्डल ग्रामवासियों की ओर चल रही रामलीला के दूसरे दिन रविवार को राम के जन्म पर अयोध्या में खुषियां मनाई गई।रविवार की रात्री में राम लक्ष्मण,भरत षत्रुध्न के जन्म दशरथ के द्वारा खुषियां मनाने के दृश्य का मंचन किया गया।