पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • अगले साल भी जीएसटी लागू होने के आसार नहीं

अगले साल भी जीएसटी लागू होने के आसार नहीं

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अगले साल भी लागू होने की उम्मीद कम है। सरकार खुद अब इसे अप्रैल 2016 से लागू करने की सोच रही है। राजस्व सचिव शक्तिकांत दास ने शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा, जीएसटी को 1 अप्रैल 2016 से ही लागू करना संभव लग रहा है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हम महत्वपूर्ण मुद्दों पर कितनी जल्दी आम राय बनाते हैं। दास ने कहा कि बातचीत अहम मोड़ पर है। उम्मीद है कि कुछ महीनों में सहमति बन जाएगी। उन्होंने कहा कि चार-पांच मुद्दों पर आमराय होनी है। हाल के दिनों में राज्यों से इन पर बात हुई है। दास ने बताया कि राज्य पेट्रोलियम उत्पाद समेत कुछ वस्तुओं को जीएसटी से बाहर रखना चाहते हैं, इसके बदले में केंद्र ने उन्हें वैकल्पिक फॉर्मूला दिया है।

केंद्र ने पूरा नहीं किया वादा

जीएसटीकी दिशा में पहला कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने 2007-08 में केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) को चार से घटाकर तीन फीसदी कर दिया था। इसके बाद 2008-09 में वैट लागू होने के बाद इसे दो फीसदी कर दिया गया। तब केंद्र ने वादा किया था कि सीएसटी में कमी से राज्यों को जो भी नुकसान होगा, केंद्र उसकी भरपाई करेगा। लेकिन राज्यों को 2010 से ही मुआवजा नहीं मिल रहा। 2010 तक राज्यों का 13,000 करोड़ बकाया था। इसलिए राज्य मुआवजे के प्रावधान को संविधान संशोधन विधेयक में शामिल करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हफ्ते जीएसटी पर प्रगति का जायजा लिया था।

राज्यों को कमाई घटने का डर

राज्योंके विरोध के कारण जीएसटी पर अमल कई बार टल चुका है। यूपीए सरकार ने इसे लागू करने के लिए 2011 में लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया था। इस व्यवस्था में जीएसटी केंद्र और राज्य स्तर के ज्यादातर अप्रत्यक्ष करों की जगह लेगा। राज्यों को डर है कि नई व्यवस्था में उनका कर संग्रह कम हो सकता है। इसलिए वे पांच साल तक इसकी भरपाई चाहते हैं।