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कुपोषित बच्चों का डाटा बनेगा

7 वर्ष पहले
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>जिले में तीन ट्रीटमेंट सेंटर बनाए

भास्करन्यूज | मकराना

देशकी भावी पीढ़ी स्वस्थ हो इसके लिए राज्य सरकार ने प्रदेश के पांच साल तक के सभी बच्चों के स्वास्थ्य जांच की विशेष कार्ययोजना बनाई है। कार्ययोजना के तहत हर घर में मौजूद बच्चों की स्क्रीनिंग होगी। कुपोषण के शिकार बच्चों का डाटा तैयार किया जाएगा।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग सभी अति कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें उचित उपचार दिलवाने की व्यवस्था करेगा। इसी जिम्मेदारी आशा सहयोगिनियों को दी गई है। इन्हें रोज अपने क्षेत्र के कम से कम दस घरों का निरीक्षण कर बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी जुटानी होगी। एनआरएचएम के अतिरिक्त मिशन निदेशक ने राज्य के समस्त सीएमएचओ एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को 29 दिसंबर तक जिले ब्लॉकवार पूरी सूचना भेजने के निर्देश दिए हैं। शेषपेज| 15 पर

3 ट्रीटमेंट सेंटर बनाए

जिलेमें कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए मेड़ता सिटी, परबतसर नागौर शहर में महा न्यूट्रीशियन ट्रीटमेंट सेंटर बनाए गए हैं। मकराना ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों शहरी क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जांच उपचार दिया जाएगा।

एमयूएसी फीते से जांचा जाएगा कुपोषण

निरीक्षणके दौरान बच्चों की जांच एमयूएसी फीते से की जाएगी। इस मापन प्रक्रिया में बच्चे की ऊपरी बांह का घेरा 11.5 सेंटीमीटर से कम पाया जाता है तो उसे अति कुपोषित की श्रेणी में माना जाएगा। ऐसे में उसे महा न्यूट्रीशियन ट्रीटमेंट(एमटीसी) के लिए प्रेरित किया जाएगा। आशा सहयोगिनी जांच के दौरान संबंधित बच्चे का नाम, माता पिता का नाम, उम्र, लिंग, पूर्ण पता, मोबाइल नंबर संबंधित फार्मेट में दर्ज करेगी। एएनएम से यह सूचना सत्यापित करवाकर क्षेत्र के उपकेंद्र की एएनएम को देगी। इसके बाद सभी ब्लॉकवार सूचनाएं बीसीएमओ के सत्यापन के बाद जिला स्तर पर भेज दी जाएंगी। इसी प्रकार सीएमएचओ, आरसीएचओ, डीपीएम या डीएसी सुनिश्चित करेंगे कि उनके कार्यक्षेत्र में कोई बच्चा जांच से वंचित ना रह गया हो। जहां आशा सहयोगिनी कार्यरत नहीं हैं वहां ये काम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता करेंगी।

नागरिक भी करें सहयोग

^कुपोषितबच्चों को लेकर सरकार गंभीर है। इसके लिए जनप्रतिनिधि नागरिकों को भी जागरूक रहकर स्वास्थ्य विभाग का सहयेाग करना होगा। पांच साल तक के सभी बच्चों की स्क्रीनिंग करने के लि