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‘उर्दू के साथ-साथ हिंदी भी पढ़ें मुस्लिम’
रूण|अनपढ़ों काजमाना खत्म हो चुका है। शिक्षित व्यक्ति ही समाज और देश की तरक्की में योगदान दे सकता है। वहीं मुस्लिम वर्ग अब भी शिक्षा से दूर भाग रहा है। हमें चाहिए कि कौम समाज की तरक्की में उर्दू के साथ साथ हिंदी की पढ़ाई करना बेहद जरूरी है।
यह विचार मुफ्ती-ए-राजस्थान मौलाना शेर मोहम्मद खान ने रूण में दारूल उलूम मदरसा हिंदी-उर्दू की नींव मुहूर्त के मौके पर बुधवार को व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि गरीब वहीं है जो धनी होकर भी धार्मिक कार्यों में दान नहीं देता।
इंसान को अपनी आमदनी के अनुसार दान देते रहना चाहिए। चाहे वो किसान हो या व्यापारी। इसी मौके पर मेड़ता सिटी के कारी मोहम्मद अकरम साहब ने कहा शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जैसे भोजन पानी की जरूरत है। उसी प्रकार जिंदगी को सुधारने के लिए नमाज, रोजा जकात जरूरी है। इस मौके पर समाजसेवी हाजी छोटू खान, मौलाना अब्दुल हकीम, मौलाना जावेद आलम, मौलाना मोहम्मद रफीक ने भी विचार रखे।
आयोजन समिति ने मेहमानों का इस्तकबाल किया। सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक चले तकरीर नींव मुहूर्त कार्यक्रम में सलाम पढ़कर सभी के लिए दुआ मांगी गई। इस मौके पर अनवर अली पांडू, हाजी मोहम्मद सदीक, अब्दुल रसीद, हाजी जबरुद्दीन, हाजी सुलतान, हाजी इंसाफ अली, शौकत अली खोखर, हाजी अनवर अली, मौलाना बदरूल इस्लाम सहित कई मौलाना उपस्थित थे।