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मेड़ता रोड जंक्शन पर 70 ट्रेनों के लिए मात्र 3 प्लेटफॉर्म, हर रोज होती है ट्रेनें लेट

Merta News - भास्कर संवाददाता | मेड़ता रोड मेड़तारोड रेलवे जंक्शन पर मीटर गेज से बड़ी लाइन में गेज परिवर्तन को भले ही 24 साल हो...

Dainik Bhaskar

Dec 30, 2016, 05:45 AM IST
मेड़ता रोड जंक्शन पर 70 ट्रेनों के लिए मात्र 3 प्लेटफॉर्म, हर रोज होती है ट्रेनें लेट
भास्कर संवाददाता | मेड़ता रोड

मेड़तारोड रेलवे जंक्शन पर मीटर गेज से बड़ी लाइन में गेज परिवर्तन को भले ही 24 साल हो गए है। मगर यहां पर आज भी सुविधा मीटर गेज के समय की है। 24 साल के लंबे अंतराल के दौरान सवारी ट्रेनों की संख्या में तीन गुणा से अधिक की बढ़ोतरी हुई। यहां पर मात्र तीन ही लाइन होने से अक्सर रेल यातायात ठप हो जाता है। मगर रेलवे प्रशासन की ओर से यहां पर अतिरिक्त प्लेटफॉर्म नहीं बनाया गया। जिससे अक्सर ट्रेनों को देरी का सामना करना पड़ता है और यात्रियों को खासी परेशानी होती है। जोधपुर मंडल में मीटर गेज से बड़ी लाइन में 1992 में गेज परिवर्तन हो गया था। मीटर गेज के समय मेड़ता रोड स्टेशन पर तीन लाइन थी। साथ ही सवारी ट्रेनें भी बहुत ही कम थी। मगर अब 24 सालों में सवारी ट्रेनों में तीन गुणा बढ़ोतरी हो गई है। यानी वर्तमान में 70 से अधिक ट्रेनों की आवाजाही रहती है। गाड़ियों की सबसे अधिक मारामारी सुबह 5 से 7 बजे, 10 से 1 बजे तथा शाम 6 से रात 10 बजे रहती है। सुबह हावड़ा एक्सप्रेस, मंडोर, बीकानेर-हावड़ा लिंक, जोधपुर-इंदौर इंटरसिटी, बीकानेर-जयपुर इंटरसिटी आने का समय रहता है। इसी प्रकार सुबह 10 से 1 बजे के बीच 3 सवारी ट्रेनें, मरुधर एक्सप्रेस, बांद्रा-बीकानेर, बाड़मेर-कालका एक्सप्रेस, बीकानेर-बांद्रा एक्सप्रेस, पुरी-जोधपुर आने का समय रहने से अतिरिक्त प्लेटफॉर्म की कमी महसूस होती है। रात को मंडोर एक्सप्रेस, हावड़ा, बीकानेर से लिंक एक्सप्रेस, जम्मूतवी आदि आने से अक्सर यातायात ठप हो जाता है। यहां पर 3 ही लाइन होने से 3 ही ट्रेनें एक साथ खड़ी हो सकती है। इस समय दूसरी ट्रेन आने पर वह ट्रेन आउट साइड में ही खड़ी रहती है। जोधपुर से आने वाली ट्रेन जोगीमगरा में, नागौर की तरफ से आने वाली ट्रेन छापरी जयपुर से आने वाली ट्रेन खेडूली में खड़ी कर दी जाती है। रेल मंत्रालय ने ट्रेनों में तो बढ़ोतरी कर दी। लेकिन इन्हे खड़ी करने के लिए ट्रैक की व्यवस्था की ओर ध्यान नहीं दिया। गाड़ियों की संख्या को देखते हुए 3 लाइनें अपर्याप्त साबित हो रही है। ट्रैक व्यवस्था नहीं बढ़ाने से गाड़ियां यहां पर फंस जाती है। इसका खमियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसा देखने को हर दिन मिल जाता है। ऐसे में एक्सप्रेस ट्रेनों को वरीयता दिए जाने से पैसेंजर ट्रेन के यात्रियों को तो काफी देर तक छोटे रेलवे स्टेशनों पर खड़ा रहना पड़ता है।

प्लेटफॉर्म की संख्या बदलने पर यात्री होते हैं परेशान

सभीट्रेनों के आगमन-प्रस्थान के लिए प्लेटफॉर्म सुनिश्चित है। मगर ट्रेनों की मारामारी रहने के कारण स्टेशन मास्टर को ट्रेन को प्लेटफॉर्म में लेने के लिए कई बार अचानक प्लेटफॉर्म की संख्या बदलनी पड़ती है। जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। हाल ही में दो दिन पूर्व मंडोर एक्सप्रेस का इंजन फेल हो जाने के कारण यहां पर ट्रेनों को खड़ी करने के लिए जगह नहीं होने पर आखिर रेवाड़ी-जोधपुर को खेडूली में डेढ़ घंटे तक खड़ा रखना पड़ा। सोमवार शनिवार को तो स्थिति ज्यादा विकट होती है। वैसे सप्ताह में साप्ताहिक ट्रेनों की आवाजाही से यहां पर अतिरिक्त प्लेटफॉर्म की कमी रहती है।

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मेड़ता रोड जंक्शन पर 70 ट्रेनों के लिए मात्र 3 प्लेटफॉर्म, हर रोज होती है ट्रेनें लेट
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