साधु-संतों के आशीर्वाद से ही हो जाता है भक्तों का भला : पं. नागर
मेड़तासिटी
भास्कर संवाददाता | मेड़ता सिटी
पारीकपाठशाला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कथा वाचक पं. प्रभुजी नागर ने प्रवचनों में कहा कि संतों में जितनी सहनशीलता होती है उतनी किसी में नहीं होती। संत तो केवल अपने आशीर्वाद मात्र से भक्त का भला कर देते हैं। संतों की शरण में जाता है, वो धन्य हो जाता है। बड़े-बड़े महापुरुषों ने संतों की शरण में जाकर अपने जीवन को निर्मल किया है। उन्होंने कहा कि भगवान की उपस्थिति यज्ञ में है ना तप में हैं। भगवान तो केवल श्रद्धा मात्र से उपस्थित हो जाते हैं। जहां श्रद्धा होती है, वहां श्याम तो सपनों में ही जाते हैं। जिनके पास संतों के सत्संग की संपति होती है। उनको हमेशा परमानंद की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार धन को भक्ति में बाधक बताते हुए नागर ने कहा कि महापुरुष कभी अपने पास धन नहीं रखते बल्कि वो उसे केवल परमार्थ में लगाकर ही मस्त हो जाते हैं।
दधवाड़ा|कस्बेके निकटवर्ती ग्राम नोखा चांदावता स्थित देवासियों के मोहल्ले में दाता गुलाब दास महाराज की जन्मस्थली प्रांगण में चल रही श्रीमद भागवत कथा सप्ताह भक्ति ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन कथावाचक आचार्य पंडित राधेश्याम महाराज ने कहा कि भगवान भक्त की पुकार पर उसकी मदद करते है और भक्तों का कल्याण करते है। उन्होंने कहा कि जिस तरह आकाश से गिरा हुआ जल सागर में मिल जाता है ठीक उसी प्रकार किसी भी अवतार की पूजा की जाए तो वह भगवान कृष्ण की ही पूजा होगी। आचार्य वृदांवन ने सत्य पर व्याख्यान दिया। इस दौरान कथा प्रसंग के अंतर्गत झांकियां भी सजाई गई। कथा वाचन के दौरान हरिराम देवासी, मांगूराम देवासी, प्रकाश कटारिया, सोहनराम, पृथ्वीसिंह भाटी, लूणाराम देवासी, ओमाराम देवासी, नरेंद्रसिंह भाटी, राजू राईका, तेजाराम राईका, मंगल सिंह कच्छावा सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।