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सहरावदा में 50 साल से रह रहे लोगों को बिजली-पानी कनेक्शन मिले, पट्टे नहीं

5 वर्ष पहले
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मोड़क स्टेशन। सहरावदा बस्ती। जमीन के पट्‌टे नहीं मिलने से लोन सुविधा नहीं मिल रही।

भास्कर न्यूज. मोड़क स्टेशन

सहरावदागांव को बसे 50 साल से अधिक हो गया। बिजली और पानी के लिए यहां नल कनेक्शन भी दे दिए गए, लेकिन जमीन के पट्टे नहीं होने से लोगों के पास मालिकाना हक के दस्तावेज नहीं हैं। जमीन को वन विभाग अपनी बताता है। दस्तावेज नहीं होने से लोगों को लोन आदि भी नहीं मिल पा रहे।

सहरावदा बस्ती जगजीवन बस्ती के नाम से भी जानी जाती है। इसमें पंचायत के 5 वार्ड आते हैं। जहां की आबादी 6 हजार से अधिक है। यहां मतदाताओं की संख्या 2500 से अधिक है। फिर भी अधिकारी बस्ती को वन विभाग की जमीन पर बनी हुई बताकर पट्टा जारी नहीं कर रहे हैं। लोगों को सरकारी पानी और बिजली मिल रही है। पंचायत इस जगह पर सारे कार्य करवा रही है। सीसी रोड हो या हैंडपंप सभी सरकारी सुविधा मिल रही है, फिर भी मकानों के पट्टे नहीं बनाए जा रहे हैं। ऐसे ही ढाबादेह की बस्ती है। उसको करीब 9 वर्ष पूर्व वन विभाग ने नोटिस जारी कर मकान हटाने के लिए लोगों को बोला था। उस समय लोग सड़कों पर उतर आए थे और प्रशसन के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया था। उस वक्त रामगंजमंडी विधायक प्रहलाद गुंजल ने लोगों के मकान टूटने से बचाए थे और प्रशसन ने भी लोगों से मकानों के पट्टे देने की बात कही थी। उसी के बाद लोगों ने बस्ती का नाम ही गुंजल कॉलोनी रख दिया था। अब इस बस्ती को गुंजल कॉलोनी के नाम से ही जाना जाता है। बस्ती में रोड के सहारे काफी संख्या में दुकानें भी बनी हुई हैं। दुकानवालों ने बताया कि अगर पट्टे बन जाएं, तो हमें व्यापार चलाने के लिए सरकारी लोन आसानी से मिल सकता है।

वनविभाग की भूमि का पट्टा कोई भी संस्था नहीं दे सकती

सरपंचनिर्मला मीणा ने बताया कि सरकार को सहरावदा और गुंजल कॉलोनी के लोगों के मकानों के पट्टे वाली समस्या को सुलझाना चाहिए। अब बस्ती काफी बड़ी हो चुकी है। नायब तहसीलदार मोइनुद्दीन ने बताया कि बस्ती को बसे काफी समय हो गया, लेकिन वन विभाग की जमीन पर पंचायत पट्टा जारी नहीं कर सकती। वन विभाग के अधिकारी लीलाराम शर्मा ने बताया की वन विभाग की भूमि पर बसे गांव के मकानों के पट्टे के लिए काफी समय से मांग उठ रही है, लेकिन वन विभाग की भूमि का पट्टा कोई भी संस्था नहीं दे सकती।

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