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दो विभागों के नाम पर पर्यटकों से वसूले ‌~ 12 करोड़, आपस में बांटे नहीं, अब दो जगह वसूली

5 वर्ष पहले
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नतीजा : वन विभाग ने अपना टोल टैक्स शुरु किया, असर यह कि अब पर्यटक दो दो जगह टैक्स दे रहा है

विश्वबन्धुशर्मा | सिरोही

माउंटआबूमें घुसते ही नगर पालिका के टोल बूथ पर पर्यटक टैक्स चुकाते हैं। पिछले करीब 20 साल में पालिका ने इस टैक्स के नाम पर जो रकम पर्यटकों से वसूली उसमें से करीब 4 करोड़ रुपए वन विभाग को नहीं चुकाए। सरकार और प्रशासनिक अधिकारी इसका कोई हल नहीं निकाल पाए, नतीजा यह कि वन विभाग ने दूसरी जगह पर अपनी टोल वसूली शुरु कर दी। ताकि वह अपनी हिस्सा राशि की क्षतिपूर्ति कर सके और भविष्य में भी उसे हिस्सा नहीं लेना पड़े। दोनों विभागों की इस लड़ाई में पर्यटक एक ही टैक्स को दो बार चुका रहा है। वह पालिका को वन विभाग का हिस्सा दे रहा है और वन विभाग को पालिका की बकाया राशि भी दे रहा है।

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होना क्या चाहिए, तीन विकल्प हैं इसके

पहला

{नगरपालिका अपने टोल प्लाजा पर तीस प्रतिशत दर कम करे।

दूसरा

{वन विभाग सनसेट प्वाइंट पर टोल बंद करे या तीस प्रतिशत की दर से टैक्स ले।

तीसरा

{वन विभाग टै्रवर टैंक पर भी यात्रियों से शुल्क लेता है। ऐसी स्थिति में उसे वहां शुल्क बंद करना चाहिए।

4 सदस्यों का परिवार, यानी 300 रुपए का दोहरा टैक्स

इसेऐसे भी समझें कि यदि चार सदस्यों का एक परिवार पांच सीटर कार से माउंटआबू आता है तो उसे पालिका के टोल टैक्स पर सौ रुपए देने होंगे। इसमें 30 प्रतिशत हिस्सा वन विभाग का है। अब सनसेट प्वाइंट पर जाने के लिए उसे वापस वन विभाग को टैक्स देना होगा। जहां उसके 200 रुपए लगेंगे। जबकि पालिका पहले ही वन विभाग का 30 प्रतिशत हिस्सा ले चुका है। यानी एक ही टैक्स के नाम पर यह परिवार 300 रुपए चुकाएगा।

नतीजा: सरकारी खजाना भर रहा, पर्यटक मायूस

दोनोंविभागों की इस लड़ाई और सरकार की चुप्पी के बीच गुपचुप में लागू किए गए नए टोल टैक्स से सरकार का खजाना भर रहा है, लेकिन पर्यटक मायूस है। दोनों विभागों में पिछले दिनों इस बात पर तो सहमति बन गई कि पालिका अपनी बकाया राशि चुकाएगी, लेकिन सनसेट प्वाइंट पर वन विभाग को टोल टैक्स जारी रहेगा या नहीं इसको लेकर कोई स्पष्ट स्थिति नहीं है।

ऐसे समझें, एक ही टैक्स दो बार ले रही

नगर पालिका

{पालिकापांच सीटर एक कार से 100 रुपए टोल टैक्स लेती है। इसमें से 30 प्रतिशत हिस्सा यानी 30 रुपए वन विभाग के हुए।

{अपनी हिस्सा राशि नहीं मिलने पर वन विभाग ने 22 जनवरी 2017 से सनसेट पर अपना अलग टोल शुरु कर दिया। जहां वह प्रति भारतीय पर्यटक से 50 रुपए ले रहा है।

{यानी प्रत्येक पर्यटक वन विभाग की हिस्सा राशि पालिका को टोल बूथ पर भी दे रहा है और वन विभाग को भी दे रहा है।

वनविभाग

{वनविभाग ने सन सेट प्वाइंट पर अपना टोल प्लाजा लगाया है। ताकि वह अपने हिस्से की राशि वसूल सके। यहां प्रति भारतीय पर्यटक 50 रुपए लिए जा रहे हैं।

{पालिका अभी अपने टोल बूथ पर वाहन कर लेती है। दीपावली से पहले वह प्रति व्यक्ति 10 रुपए लेती थी। यानी इसमें तीस प्रतिशत के अनुसार तीन रुपए वन विभाग के हुए।

{उन तीन रुपए की जगह अब वन विभाग प्रति पर्यटक 50 रुपए वसूल रहा है। यानी वह पालिका पर पहले की बकाया राशि भी पर्यटकों से ही ले रहा है।

बकाया था, इसलिए लगाया शुल्क

^पालिकापर हमारा ब्याज समेत 17 करोड़ बकाया है। इसलिए हमने यह शुल्क लगाया। हालांकि अब उन्होंने बकाया राशि और अब नियमित हिस्सा राशि देने की बात कही है, लेकिन सनसेट प्वाइंट पर टोल उच्च स्तर पर निर्णय के बाद ही हटाया जा सकेगा। -केजी श्रीवास्तव, उपवन संरक्षक, माउंटआबू

हमने चुकाए, लेकिन ऑडिट में आपत्ति

^हमारेकार्यकाल में हमने तीन अलग अलग किश्तों में 30 प्रतिशत हिस्सा चुकाया है। आगे के लिए हमारे बीच सहमति बन चुकी है। जिसमें हम समयबद्ध तरीके से नियमित टैक्स और पहले का बकाया चुकाएंगे। वन विभाग ने भी इस पर सहमति दी है कि वह दूसरे नाके नहीं लगाएगा। हालांकि पहले ऑडिट आब्जेक्शन के कारण उनका भुगतान रोका गया था। -सुरेश थिंगर, पालिकाध्यक्ष, माउंटआबू

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