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शव दफनाने को लेकर विवाद

6 वर्ष पहले
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मुकुंदगढ़। बलरिया में मंगलवार दोपहर जोहड़ में शव दफनाने की बात पर विवाद हो गया। शव ईंट-भट्टे पर काम करने वाले मजदूर का था जो उत्तर प्रदेश का रहने वाला था। सोमवार को सीकर के एसके अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।

जानकारी के मुताबिक मंगलवार दोपहर जीतू का शव ट्रैक्टर ट्रॉली में लेकर पिता रामफेरे पांच-सात अन्य मजदूर बलरिया जोहड़ में दफनाने पहुंचे। गड्ढा खोदते देख काफी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए।

इन्होंने शव को नहीं दफनाने दिया। वे लोग जीतू की मौत मामले की निष्पक्ष जांच भट्टा मालिक से मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की मांग कर रहे थे। डीएसपी दिलीप सैनी ने मामले की जानकारी ली। एसएचओ बाबूलाल गुर्जर ने मौके पर मौजूद सरपंच चुन्नीलाल, चतरसिंह सहित ग्रामीणों आदि से बातचीत कर समझाइश की। पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन देते हुए नवलगढ़ सीएचसी में पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया।

गौरतलब है कि रामफेरे ने पुलिस में रिपोर्ट दी थी कि उसका बेटा जीतू तीन-चार दिन से बीमार था। सीकर के एसके अस्पताल में इलाज के दौरान सोमवार को उसने दम तोड़ दिया।

रिपोर्ट में परिजनों का आरोप था कि भट्टा मालिक ने इलाज के लिए रुपए नहीं दिए जिसके अभाव में जीतू की मौत हो गई। ग्रामीणों के विरोध के चलते मौके पर आए भट्टा मालिक को गांव का ही रवि शर्मा वहां से ले गया। इससे भी ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। एक बारगी तो तनाव का माहौल बन गया था।