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विदेशी कंपनियां भी महसूस कर रहीं बिजनेस माहौल में बदलाव
विदेशी कंपनियां भी मानने लगी हैं कि केंद्र में नई सरकार के आने के बाद बिजनेस का माहौल बदला है। हालांकि कर ढांचे और नियमों को लेकर अब भी उनमें अनिश्चितता बनी हुई है। मर्सिडीज इंडिया के सीईओ एबरहार्ड कर्न ने विशेष बातचीत में कहा कि सेंटिमेंट बदला है, लोग अब ज्यादा सकारात्मक दिख रहे हैं, ग्राहकों की तरफ से पूछताछ बढ़ी है। अब इस सेंटिमेंट के बिक्री में बदलने का इंतजार है। उन्होंने कहा कि भारतीय कार बाजार की स्थिति अब भी बहुत अच्छी नहीं है। हालांकि मर्सिडीज पिछले साल 32 फीसदी और इस साल की पहली छमाही में 25 फीसदी ग्रोथ दर्ज करने में कामयाब रही है।
स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार मेक इन इंडिया का जिक्र किया था। उसके बाद कई ऑटो कंपनियों ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार करने और एक्सपोर्ट हब बनाने की घोषणा की है। कर्न ने कहा कि मर्सिडीज भी इस दिशा में आगे बढ़ेगी। कंपनी चाकन प्लांट की क्षमता 10,000 से बढ़ाकर 20,000 यूनिट सालाना कर रही है। अभी पांच मॉडल यहां बनते हैं, इनका भी विस्तार किया जाएगा। जहां तक निर्यात की बात है तो फिलहाल ऐसी योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में रिकवरी के मद्देनजर हमें भी लक्जरी कार मार्केट में तेजी की उम्मीद है। इस मार्केट में पैठ बढ़ाने के लिए कंपनी नए मॉडल के साथ डीलर नेटवर्क का भी विस्तार कर रही है। अभी 36 शहरों में कंपनी की 64 डीलरशिप हैं। महानगरों के बाहर लक्जरी कारों की अच्छी डिमांड है। मर्सिडीज की आधे से ज्यादा कारों की बिक्री दिल्ली-एनसीआर और मुंबई के बाहर ही होती है।
भारत में कार बिजनेस बहुत मुश्किल है। उत्पाद और सीमा शुल्क काफी ज्यादा है, ढेर सारे नियम कायदे हैं, कर ढांचा असंगत है। सरकार ने कुछ उपायों की घोषणा की है। उम्मीद है कि इसके बाद हालात बेहतर होंगे।
-एबरहार्डकर्न, सीईओ,मर्सिडीज इंडिया