वर्ष 2015-2016
बजट हर साल बढ़ा, शहर का विकास फिर भी गौण
बजट कैसे तैयार होना चाहिए और होता क्या है
आंकड़े एक नजर
वित्तीय वर्ष 2012-13 : खर्चका प्रावधान: 4517.68 (राशि लाखों में), खर्च किया: 3759.54, आय का प्रावधान: 3856.19, आय: 4353.17
वर्ष2013-14 : प्रावधान:5552.88, खर्च किया: 5233.68, आय प्रावधान: 4620.67, हुई: 4765.61, नाली, , डामरीकरण, सीसी सड़क: प्रावधान 1578.93, खर्च 1473.42, डिपोजिट वर्क्स प्रावधान 1578.42, खर्च 1248.25, प्रकाश व्यवस्था: प्रावधान 75 लाख, खर्च 69.71 रुपए
वर्ष 2014-15: संभावित आय बजट 5702.66, संशोधित 6630.35, आय 31 जनवरी तक 575073702.55।
ये हैं प्रमुख समस्या
1.पार्किंग: तीनपार्किंग स्थल नगर निगम बना चुका है। लेकिन अभी भी पार्किंग व्यवस्था बदहाल है। बिल्डिंग बायलॉज के मुताबिक भी किसी भी इमारत के सामने पार्किंग तय नहीं है।
2.अतिक्रमण: खुदनिगम की जमीनों पर अतिक्रमण है। यातायात व्यवस्था के सुचारू संचालन में अतिक्रमण आड़े रहा है।
3.सफाई : सफाई परसालभर में साढ़े चार करोड़ रुपए से अधिक ठेके पर व्यय किए जाते हैं। लेकिन कोई इलाका नहीं जहां बेहतर व्यवस्था हो।
4.पार्क: नगरनिगम के 19 पार्क है। एक भी अफसर ने आज तक इनमें जाकर नहीं देखा है। बजट में अवश्य 30 से 40 लाख रुपए व्यय करने का प्रावधान रखा जाता है।
भरतपुर. सफाई का बजट पूरा रहता है, लेकिन हालात ये हैं। फोटो कमला नगर का है।
मेघश्याम पाराशर|भरतपुर
नगरपरिषद से नगर निगम बनने के बाद शहर के विकास के लिए 13 फरवरी को दोपहर दो बजे पहले बजट पर चर्चा होगी।
इस बार बजट में विकास पर खर्च के लक्ष्य को 10 प्रतिशत तक बढाने की तैयारी की गई है। यह बैठक बजट अनुमान वर्ष 2015-16 एवं संशोधित बजट अनुमान 2014-15 के लिए है। पिछले तीन साल में नगर निगम का बजट 37 करोड़ से करीब 66 करोड़ तक पहुंच गया, लेकिन शहर की मूलभूत समस्याएं पार्किंग, अतिक्रमण, सफाई, रोशनी व्यवस्था आज भी यथावत हैं।
पूर्व और वर्तमान प्रतिनिधि कुछ नया चाहते हैं, लेकिन कुछ साल के बजट के आंकड़े बताते हैं कि बजट में विकास की हकीकत सिर्फ सपने ही रहती है।निगम का यह पहला बजट होगा, लेकिन बजट में क्या खास रहेगा, यह अभी तय नहीं हो सका है। शहरी सरकार के नुमाइंदों के साथ शहर की जनता को भी इससे काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। सच्चाई यह है कि आम आदमी की मूलभूत सुविधाएं सड़क, नाली, रोशनी, पार्क आदि पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं। वजह ये है कि बजट का लंबा चौड़ा खाका तो तैयार कर लिया जाता है।
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बजट हर साल बढ़ा...
लेकिनइनकम की कसरत नहीं होती। नतीजा विकास पर खर्च भी नहीं बढ़ पाता है। विपक्ष में बैठी पार्टियों ने कभी भी इस गंभीर मुद्दे पर सवाल उठाने तक की जहमत नहीं की। दैनिक भास्कर ने नए वित्तीय वर्ष के संबंध में जानने की कोशिश की आखिर कितना बजट बनाया, कैसे खर्च किया जाएगा और आय की स्थिति क्या है। एक रिपोर्ट...
संभावित बजट: 6630.35, नई सड़क, शौचालय, नाली नाला निर्माण, उद्यान सुधार वृक्षारोपण, बिजली लाइन शििफ्टंग, श्मशान, शहरी सौंदर्यीकरण आिद पर 16.62 लाख खर्च होंगे।
>सभी अनुभागों के मुखिया से सिफारिश मांगनी चाहिए।
क्याकरते हैं: ज्यादातरआंकड़े टेबल पर बैठकर तैयार किए जाते हैं।
>पार्षदों से उनके क्षेत्र की आवश्यकता पूछी जानी चाहिए।
क्याकरते हैं: किसीभी पार्षद से कुछ नहीं पूछा जाता है। सारा काम लेखा शाखा परिषद के आला अधिकारियों कर्मचारी करते हैं।
>हर अनुभाग की मांग जनता की मांग को देखते हुए खर्च की राशि तय की जानी चाहिए।
क्याकरते हैं: सालोंसे चले रहे फॉर्मेट को सामने रखकर कहीं कुछ ज्यादा खर्च आय तो कहीं कम खर्च आय के आंकड़े भर दिए जाते हैं।
>बजट के लिए बैठक की जाती और वित्त समिति के साथ एक-एक मद पर बातचीत होनी चाहिए। शहर के गणमान्य लोगों को भी बुलाया जा सकता है।
क्याकरते हैं: निगमके कुछ अधिकारी खुद जेब देखकर आय का प्रावधान तय कर देते हैं। इससे हमेशा आय प्राप्ति का लक्ष्य गड़बड़ रहता है। इससे निगम का इनकम मैनेजमेंट प्रभावित होता है।
>आय का प्रावधान कहीं कम तो कहीं ज्यादा कर दिया जाता है।
क्याकरते हैं: पिछलेबजट के आंकड़ों में उलटफेर कर दिया जाता है।