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सरकारी दावा- दवाकम नहीं, हकीकत-दवाकहीं भी नहीं
^डिमांड के बारे में उच्चाधिकारियों को बताने की जरूरत नहीं होती। वे स्वयं ऑनलाइन सप्लाई की डिमांड देख सकते हैं। - डॉ.ओपी थाकन, सीएमएचओ,जयपुर
सप्लाई की स्थिति ऑनलाइन देख सकते हैं
^इंजेक्शनदिए जाने की एक प्रक्रिया है। उसी के तहत इंजेक्शन दिए जाते हैं। सीएचसी से सीएमएचओ, फिर ड्रग वेयर हाउस और फिर मुख्यालय पर रिपोर्ट आती है। जिन स्थानों पर इंजेक्शन नहीं हैं, उनके बारे में सीएमएचओ को जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि डिमांड भी उन्हीं के पास आती है। -एमडीनवीनजैन आरएमसीएल
कंपनी ~662 के हिसाब से ही देगी इंजेक्शन
सर्पदंशसेपीड़ितों के इलाज की दवा एएसवी इंजेक्शन की कमी की बात को सरकार नकार चुकी है। सरकार विधानसभा में कह चुकी है कि दवा उपलब्ध है, इसकी कमी मौत की वजह नहीं। ...लेकिन हकीकत अलग है। गुरुवार दोपहर तक जयपुर सहित प्रदेश के ज्यादातर जिला अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी में एएसवी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं थे। भास्कर ने प्रदेश के 22 सीएचसी और पीएचसी की पड़ताल की। पता चला कि इनमें से किसी भी केन्द्र पर दवा है ही नहीं। ऐसे में चिकित्सा मंत्री की ओर से विधानसभा में दिया गया बयान पर सवाल खड़े होते हैं। दवा है तो कहां? डिमांड कितनी है? डिमांड पर सप्लाई हो रही है कि नहीं? और इससे भी बड़े सवाल...जब दवा की कमी सर्पदंश पीड़ित की मौत की वजह नहीं तो फिर क्या वजह है?
जोधपुर में सर्पदंश से पीड़ित एक व्यक्ति को 380 इंजेक्शन लगाने की बात पर इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। बुधवार को इंजेक्शन की जांच के आदेश हुए थे, गुरुवार को जांच के लिए भी इंजेक्शन नहीं मिला। इधर, जयपुर के अपेक्स हॉस्पिटल में भर्ती राहुल को गुरुवार को छुटटी दे दी गई। उसे एसएमएस अस्पताल से लाया गया था।
5 दिन से एसएमएस में भर्ती कालू।
एएसवी इंजेक्शन कीक्रय दर अन्य किसी भी स्टेट से कम है। ऐसे में कोई भी कंपनी~432.51में यह दवा उपलब्ध नहीं करा सकती।
रेट क्या?
जबकि विभाग ने ~436.51 देने की बात कही तो कंपनी ने अंडर प्रोटेस्ट कर दिया।
कंपनी ने ~662 प्रति दर के अनुसार की कीमत तय की है।
जानकारी के अनुसार कंपनी ने इस कीमत पर इंजेक्शन देने से मना कर दिया। अब विभाग कंपनी को ~662 कि हिसाब से ही भुगतान करेगा।
इंजेक्शन भेजने का तरीका क्या?
34 ड्रग वेयर हाउस हैं जिले में।
सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पताल इंजेक्शन की डिमांड सीए