पानी को तरसे व्यापारी पशु
संभागमुख्यालय स्थित नुमाइश मैदान पर श्री जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेले का आयोजन 29 सितंबर से शुरू होगा, मेला स्थल पर अब तक पानी एवं छांव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी है। मेले के लिए राजस्थान सहित विभिन्न प्रांतों से बड़ी संख्या में अभी से पशु व्यापारी पशुओं की बिक्री और खरीद के लिए जुटने लगे हैं।
मेला स्थल पर बड़ी संख्या में ऊंट, बछड़ा, बछड़ी, गाय, भैंस, बकरी, भेड़, घोड़ा, घोड़ी दिखाई पड़ने लगने लगे हैं। पशु पालन विभाग द्वारा मेला आयोजन पर पशु व्यापारियों से रवन्ना के नाम पर धन राशि भी वसूली जा रही है, लेकिन पशु और व्यापारियों के लिए पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं किए जाने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि यहां सोमवार को पशुओं की साप्ताहिक हाट लगती है, फिर भी पशु मेला स्थल पर पशुओं की प्यास बुझाने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई खेली सूखी पड़ी है। व्यापारियों को अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। साथ ही उन्हें अपने पशुओं के पीने के लिए भी टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। यह हाल तो जब है, तब कि पशु मेला स्थल के निकट ही जलदाय विभाग की आकाशीय पेयजल टंकी और कनिष्ठ अभियंता कार्यालय स्थित हैं। जहां रोजाना लाखों लीटर पानी नालियों में बहकर चला जाता है। गत वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष तेज गर्मी के कारण भी व्यापारियों को परेशानी अधिक हो रही है, जिसके कारण व्यापारी अपने पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए मेला स्थल पर बनी पक्की दुकानों में बांधने को मजबूर हैं।
^मेलास्थल पर पशुओं के पेयजल के लिए बनी खेली की मरम्मत कराने के लिए नगर निगम के एईएन को कहा गया है। जल्द ही पानी भरवाने की व्यवस्था कराई जाएगी।
-डॉ.निरंजन लाल मीणा, मेलाअधिकारी
मेला आयोजन पर 16 लाख खर्च, फिर भी बना रहता है मर्ज
मेलाआयोजन पर पशुपालन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष करीब 16-17 लाख रुपये खर्च किया जाता है। जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, कुश्ती दंगल, पशु प्रतियोगिता अन्य व्यवस्थाएं शामिल हैं, लेकिन फिर भी पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए देश भर से आए पशु एवं व्यापारियों को तेज गर्मी में प्यास बुझाने के लिए भटकना पड़ रहा है।
अवैधवसूली पर रोक के लिए जारी होंगे परिचय पत्र
मेलेमें पशु व्यापारियों एवं दुकानदारों से अवैध वसूली पर रोक के लिए अधिकारी एवं कर्मचारिय