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मुख्यमंत्री ने भंग किया राज्य शहरीकरण आयोग
चार साल पहले गहलोत सरकार ने किया था गठन
जयपुर| मुख्यमंत्रीवसुंधरा राजे ने शुक्रवार शाम राज्य शहरीकरण आयोग को भंग कर दिया। शहरों के विकास का भावी खाका खींचने और सरकार को एक्सपर्ट सिफारिश के लिए 10 फरवरी 2011 को अशोक गहलोत सरकार ने इस आयोग का गठन किया था। यह आयोग पिछले 4 साल में शहरीकरण के विकास को लेकर एक भी फाइनल रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंप पाया। सीएम ने गत दिनों आयोग की लचर कार्यप्रणाली पर नाराजगी प्रकट की थी। यूडीएच की सिफारिश और प्रगति रिपोर्ट की फाइल शुक्रवार को सीएम के पास पहुंचते ही इसे भंग करने को मंजूरी दे दी गई। शेष| पेज 4
सरकारने यूडीएच को निर्देश दिए हैं कि आयोग में प्रोबेशन एवं डेपुटेशन पर लगे स्टाफ को सोमवार से मूल विभाग में भेजा जाए और संविदा पर लगे लोगों को हटाया जाए।
4साल में नतीजा सिफर रहा
पिछलेचार साल से आयोग जेडीए के पास नगर नियोजन भवन में चल रहा था और इसके अध्यक्ष वरिष्ठ आईएएस केके भटनागर हैं, जो जेडीसी सहित विभिन्न उच्च पदों पर रह चुके हैं। आयोग को शुरुआत में दो साल संचालन के लिए पांच करोड़ रुपए का फिक्स बजट दिया था, लेकिन आयोग ने तीन बार एक्सटेंशन करा दिया। इस बार आयोग का कार्यकाल मार्च 2015 तक बढ़ाया गया था। इसे शहरों के व्यवस्थित एवं संतुलित विकास के लिए भावी प्लान को लेकर एक्सपर्ट रिपोर्ट सिफारिश देनी थी। आयोग ने छह बैठकें भी कर ली। एक अंतरिम रिपोर्ट प्रकाशित कराई, लेकिन उसको फाइनल करने के नाम पर तीन बार आयोग का कार्यकाल सरकार से बढ़वा लिया गया। आयोग अपनी अंतरिम रिपोर्ट को फाइनल नहीं कर पाया। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि यूडीएच और पीडीकोर कंपनी मिलकर अंतरिम रिपोर्ट को फाइनल कर सीएम को सौंपे।