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परमाणु दुर्घटना होने पर विदेशी कंपनियों पर नहीं कर सकेंगे केस
सरकारने साफ कर दिया है कि भारत का परमाणु जवाबदेही कानून नहीं बदला जाएगा। लेकिन एटमी दुर्घटना होने पर परमाणु रिएक्टर सप्लाइ करने वाली किसी विदेशी कंपनी पर पीड़ित मुकदमा नहीं कर सकेंगे। हालांकि, रिएक्टर का संचालन करने वाली कंपनी क्षतिपूर्ति का दावा कर सकेंगी। आम आदमी पर इसका कोई बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार ने अमेरिका के साथ हुए एटमी करार की जानकारी सार्वजनिक की है।
परमाणु दुर्घटना के संबंध में नागरिक दायित्व, क्षतिपूर्ति और दावे के विषय में विदेश मंत्रालय ने सात पेज में यह जानकारी दी। इसका शीर्षक है- \\\"प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्न\\\'। मामले में नीतिगत अड़चनें दूर करने के लिए भारत-अमेरिका परमाणु संपर्क समूह के बीच तीन दौर की बातचीत के बाद सहमति बनी है। इसकी अंतिम बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा से तीन दिन पहले लंदन में हुई थी। ओबामा 25 जनवरी को भारत पहुंचे थे। इसके बाद अमेरिका के साथ असैन्य परमाणु सहयोग के दो लंबित मुद्दों पर सहमति बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओबामा ने 25 जनवरी 2015 को इसकी पुष्टि की।
समझौतेकी धारा-46 के व्यापक दायरे पर थी चिंता
विदेशमंत्रालय ने कहा कि घरेलू और विदेशी सप्लायरों ने समझौते की धारा-46 के व्यापक दायरे पर चिंता जताई थी। उन्हें आशंका थी कि अन्य कानूनों के तहत भी क्षतिपूर्ति के दावे किए जा सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि एटमी दुर्घटना होने पर मुआवजे के लिए अन्य कानूनों के तहत किए जाने वाले दावे इस धारा से नहीं जुड़ते। यह धारा खास तौर पर संचालक पर ही लागू होती है।
केंद्र की 66 योजनाओं की संख्या घटाकर 10 की जा सकती है। मौजूदा योजनाओं में से कुछ खत्म हो सकती हैं। कुछ राज्यों के हिस्से जा सकती हैं। मुख्यमंत्रियों के तीन उप-समूह इस संबंध में फैसला करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में रविवार को हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की पहली बैठक में लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र की योजनाओं में कटौती से तमिलनाडु और यूपी जैसे कुछ राज्य नाराज भी हो सकते हैं। इन राज्यों ने बैठक के दौरान सरकारी योजनाआें के लिए ज्यादा फंड की मांग की है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पन्नीरसेलवम ने कहा, ‘केंद्र की बड़ी योजनाओं में राज्यों की हिस्सेदारी 25 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।’ बैठक में 31 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया। लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नहीं पहुंचीं। इस दौरान मोदी ने कहा, ‘हमें सबको एक तराजू में तौलना छोड़ राज्यों की जरूरत के हिसाब से योजनाएं बनाने की जरूरत है।’ इन योजनाओं के लिए 2014-15 में 3,38,562 करोड़ रुपए का बजट था। वित्त वर्ष 2013-14 से दोगुना। पिछले साल इन योजनाओं की संख्या 147 से घटाकर 66 की गई थी।