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विकास के संकल्प में अमेरिकी भारतवंशी

7 वर्ष पहले
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अमेरिका मेंप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैसा समा बांधा है, इसकी झलक न्यूयॉर्क में देखने को मिली। उनके स्वागत में जैसा उम्दा आयोजन भारतीय मूल के अमेरिकावासियों ने किया, उसके निहितार्थ दूरगामी हैं। उल्लेखनीय है कि इस समारोह में तीन दर्जन से ज्यादा अमेरिकी सांसद भी मौजूद थे। उन्हें अवश्य ही यह संदेश मिला होगा कि उनके देश में भारतीय समुदाय आज कितना प्रभावशाली है। अमेरिका में 28 लाख से ज्यादा अनिवासी या प्रवासी भारतीय हैं। वहां उन्हें सबसे धनी समुदायों में गिना जाता है। उनके ही उत्साह और संसाधनों से मशहूर मेडिसन स्क्वेयर पर मोदी को यह एलान करने के लिए मंच मिला कि 21वीं सदी भारत की है। मोदी ने इस समुदाय की शक्ति और उनमें निहित संभावनाओं को बेहतर ढंग से समझा है। भारत में निवेश के लिए धन और तकनीक को आकर्षित करने की उनकी मुहिम में प्रवासी भारतीय खासे मददगार हो सकते हैं। एक तो अमेरिकी-भारतीय समुदाय के पास ये दोनों चीजें मौजूद हैं और दूसरे अमेरिकी नीतियों को प्रभावित करने की उनकी क्षमता लगातार बढ़ी है। अतः उचित ही है कि प्रधानमंत्री ने इन लोगों से देश के संबंध प्रगाढ़ करने के उपायों की घोषणा की। अब भारतीय मूल के व्यक्तियों (पीआईओ) को आजीवन वीजा मिलेगा। लंबी अवधि के लिए भारत आने पर पुलिस सत्यापन कराने की आवश्यकता नहीं रहेगी। साथ ही पीआईओ और ओसीआई (ओवरसीज सिटीजन्स ऑफ इंडिया) कार्डों का विलय हो जाएगा। भारत आने के इच्छुक अमेरिकी नागरिकों के लिए भारत की वीजा प्रक्रिया आसान बना दी जाएगी। बेशक इन घोषणाओं का व्यावहारिक अर्थ है और प्रतीकात्मक भी। नि:संदेह प्रवासी भारतीय अमेरिका को अपने गृह देश के रूप में अपना चुके हैं, मगर अपने धर्म, संस्कृति और जड़ों के प्रति उनका आकर्षण बरकरार है। मेडिसन स्क्वेयर पर उन्होंने अपने धन और संगठन शक्ति का भव्य परिचय दिया। आगे स्वदेश से जुड़ीं उनकी इन भावनाओं को भारत के विकास के संकल्प में बदला जा सके तो निर्विवाद रूप से भारत उससे लाभान्वित होगा। नरेंद्र मोदी ने इसी दिशा में प्रयास किया है। उनकी अमेरिका यात्रा की यह पहली बड़ी उपलब्धि है। अब देखना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से बातचीत में देश के लिए वे और क्या हासिल कर पाते हैं।

संपादकीय