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तीर्थयात्रा के लिए 7.5 हजार चुने पर 5 हजार को भी यात्रा मुश्किल
सिटी रिपोर्टर. जयपुर | वरिष्ठनागरिकों को तीर्थ कराने की योजना राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण संकट में है।
एक साल के इंतजार के बाद सरकार ने इस साल योजना के लिए आवेदन मांगे। इसके बाद भी 61 हजार बुजुर्गों ने यात्रा पर जाने की रुचि दिखाई। लेकिन सरकार ने 7500 यात्रियों का ही चयन किया। अब ट्रेनों की व्यवस्था नहीं होने के कारण पांच हजार बुजुर्गों को भी यात्रा कराना मुश्किल है, जबकि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा जुलाई से अब तक 60 हजार यात्रियों को यात्रा कराई जा चुकी है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक तीर्थयात्रा योजना के लिए आईआरसीटीसी को एक ट्रेन दी गई है। 31 मार्च तक एक ट्रेन से तीर्थयात्रा के चार से पांच फेरे ही हो सकेंगे। अगर सरकार रुचि दिखाए और ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाए तो सभी यात्री यात्रा कर सकेंगे।
अब 17 फरवरी से शुरू होगी यात्रा
तीर्थयात्रा के लिए पहली ट्रेन का समय 10 फरवरी निर्धारित किया गया था। अब पहली ट्रेन 17 फरवरी को रवाना होगी। देवस्थान कमिश्नर अशोक यादव ने बताया कि पहली ट्रेन रामेश्वरम के लिए रवाना होगी। इसमें 907 यात्री रवाना होंगे। उधर रेलवे के सीपीआरओ तरुण जैन ने बताया कि हमने आईआरसीटीसी से प्रस्ताव मांगा है।
मध्यप्रदेश में जुलाई से 1 फरवरी तक 63 गाड़ियां
मध्यप्रदेशमें भाजपा सरकार की पहल पर लगभग तीन साल पहले शुरू हुई योजना में गत वर्ष जुलाई से 1 फरवरी तक 63 गाड़ियां चलाई जा चुकी है। इनमें 60 हजार बुजुर्ग यात्रा कर चुके हैं। यही नहीं मार्च तक 12 गाड़ियां और चलाई जाएंगी। यहां सरकार की रूचि के कारण रेलवे ने तीन गाड़ियां तीर्थ यात्रा के लिए लगा रखी हैं।