हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज

5 वर्ष पहले
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हर नागरिक की सेहत पर सिर्फ 488 रु. खर्च

सरकारीआंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा मातृ मृत्यु दर के मामले में यूपी दूसरे नंबर पर है। हरियाणा को छोड़ दें तो यूपी में लिंग अनुपात काफी कम है। 2016 में यूपी में 75 प्रतिशत लोग जापानी बुखार से मरे थे। उत्तरप्रदेश हर नागरिक की सेहत के लिए सिर्फ 488 रुपये ही खर्च करता है। जबकि गोवा कम जनसंख्या के बावजूद अपने नागरिकों पर इससे करीब पांच गुना ज्यादा खर्च करता है।


हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज

महिला हेल्थ वर्कर्स

सीएससी-पीएचसी में इतनी कमी

जरूरत सेे 50% कम है सहयोगी स्टाफ उत्तरप्रदेश के स्वास्थ्य केंद्रों में

सेहत पर 70% ही खर्च करती है यूपी सरकार, गोवा से 5 गुना कम

भास्कर न्यूज नेटवर्क | लखनऊ

यूपीमें केंद्र और राज्य सरकार ने प्रति व्यक्ति के स्वास्थ्य पर जो सार्वजनिक खर्च किया है वह अन्य चार चुनाव वाले राज्यों में सबसे कम है। 15 लाख जनसंख्या वाला गोवा जैसा छोटा राज्य भी अपने लोगों के स्वास्थ्य पर यूपी से 5 गुना ज्यादा खर्च करता है। ये बात विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की 2016 की स्टडी में सामने आई है। राष्ट्रीय औसत के हिसाब से यूपी औसतन 70% ही स्वास्थ्य पर खर्च करता है। इसके कारण प्रदेश में डॉक्टर्स, नर्स और स्वास्थ्य संस्थानों में सहयोगी स्टाफ की कमी है और हर दो में से एक बच्चे का पूर्ण टीकाकरण भी नहीं हो पाता। प्रदेश के लोगों को अपने 25% घरेलू खर्चों में से 14% स्वास्थ्य पर खर्च करना पड़ता है। यूपी में डॉक्टरों की तादाद सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के आधे से भी कम है। ब्राजील और यूपी की जनसंख्या करीब समान ही है। यानी 20 करोड़। 24 करोड़ की जनसंख्या वाले कतर के बराबर इकोनॉमी है। 75 जिले, 814 ब्लॉक्स और 97,607 गांवों वाला यूपी जनसंख्या के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य है। पर स्वास्थ्य, पोषण, बुनियादी ढांचे को देखें तो इसके सुस्त, धीमे स्तर पर सुधार और इसमें हो रही असमानता दिखाई देती है।

{यूपी सरकार हर नागरिक के स्वास्थ्य पर सिर्फ 488 रुपए खर्च करती है। 20 करोड़ लोगों में से सिर्फ 4 प्रतिशत के पास ही हेल्थ इंश्योरेंस है।

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