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नगर निगम का बजट कम, उधारी ज्यादा

7 वर्ष पहले
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भरतपुर. शहरीसरकार के लिए खुद की आय बढ़ाना चुनौती बनता जा रहा है। नगर निगम के पास विकास कार्यों पर व्यय करने के लिए 11 करोड़ का बजट उपलब्ध है, लेकिन देनदारी करीब साढ़े 15 करोड़ रुपए की है। ऐसे में निगम के लिए विकास कार्य कराने से पहले आय बढ़ाना जरूरी हो गया है। इस मामले को लेकर पूर्व में निगम की बैठक में हंगामा हो चुका है। शनिवार को मुख्य कार्यकारी अधिकारी शुचि त्यागी की अध्यक्षता में हुई निगम प्रशासन की बैठक में ऐसा मामला सामने आया। सीईओ ने लापरवाही बरतने वाले 31 संवेदकों को नोटिस देकर कार्रवाई करने निगम की आय बढ़ाने के लिए योजना बनाने की हिदायत दी।

बैठक में सीईओ शुचि त्यागी ने कहा कि काम की निर्धारित अवधि निकल जाने के बाद काम कराए जा रहे हैं, जो कि चिंता का विषय है। भविष्य में कोई भी काम समय अवधि में ही पूरे कराए जाएं। उन्होंने कहा कि वर्कऑर्डर के बाद समय पर काम नहीं करने वाले 28 निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं करने वाले करीब तीन ठेकेदारों को नोटिस देकर कार्रवाई की जाए।

शेषपेज 17 पर...

नगर निगम का बजट....

उन्होंनेएक्सईएन को निर्देश दिए कि सात दिन के अंदर एईएन, जेईएन की बैठक लेकर चर्चा करें। वर्क ऑर्डर के बाद भी संवेदक काम नहीं करता है तो नियमानुसार कार्रवाई करें। बैठक में अधिशाषी अभियंता मुकेश गुप्ता, एईएन राजीव गोयल, सहायक लेखाधिकारी अनिल गुप्ता आदि उपस्थित थे।

समय पर नहीं हो पाते काम

बैठक में सीईओ ने वार्ड दो में नाले के कार्य को 15 अक्टूबर तक कराने, वार्ड छह में लोहागढ़ स्टेडियम में रंग पुताई कार्य को 20 अक्टूबर तक कराने, वार्ड नौ, 13 15 के कार्यों को शीघ्र पूरा कराने, वार्ड 11 में आवंटित कार्य के संबंध में संवेदक सतीशचंद गुप्ता को नोटिस देने, वार्ड 24 के दोनों कार्य 15 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक पुराने कराने के निर्देश दिए। उन्होंने वार्ड 33 के कार्य को लेकर संवेदक दीपेंद्र कुमार शर्मा, वार्ड 35 का काम 14 अक्टूबर तक पूरा कराने, विधायक कोटा कार्य के लिए संवेदक प्रदीप सिरोह को नोटिस देने की बात कही।

बजट से ढाई गुना जारी कर दिए टेंडर

वर्ष 2013-14 में निगम के पास करीब 11- 12 करोड़ रुपए का बजट था। निगम ने बजट को देखने के बजाय शहर की विभिन्न वार्डों में 29 करोड़ के वर्कऑर्डर कर दिए। निगम ने निर्धारित बजट से ढाई गुना बजट के काम स्वीकृत किए। अब न