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70 किमी लंबे ग्लेशियर की चौकसी पर हर रोज खर्च होते हैं 7 करोड़ रुपए, 32 साल में देश ने खोए 882 सपूत

5 वर्ष पहले
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दुनिया कासबसे ऊंचा युद्ध का मैदान ‘सियाचिन’। यहां सबसे बड़ी लड़ाई बर्फ से होती है। यही वजह है कि 1984 के पहले तक यहां जवानों को तैनात नहीं किया जाता था। फिर अचानक पाकिस्तान यहां कब्जे की कोशिश करने लगा। 1984 में यहां पहली बार हमारी सेना की तैनाती की गई। सूचना मिली थी की पाकिस्तान हाई एल्टीट्यूड पर तैनाती में जवानों को दिए जानेवाले विशेष कपड़े और गियर खरीद रहा है। जिसके बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन मेघदूत चलाकर सियाचीन में अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर ली। पाकिस्तान 17 अप्रैल 1984 को सियाचिन पर कब्जे का ऑपरेशन शुरू करने वाला था। 13 अप्रैल 1984 को ऑपरेशन मेघदूत पूरा हुआ। इससे पहले तक इस इलाके में पर्वतारोही आते थे। लेकिन फिर यहां सेना के अलावा किसी के भी आने की मनाही हो गई। 32 सालों में यहां भारतीय सेना के 882 जवान शहीद हो चुके हैं। इनमें से 95 प्रतिशत की जान जोखिम भरे रास्तों, बर्फ या खराब मौसम ने ली है। ग्लेशियर पर हड्डियों को गला देनी वाली ठंड पड़ती है। तापमान -55 तक पहुंच जाता है। कई बार सैनिकों को ऑक्सीजन मास्क के साथ काम करना होता है। हर साल 6000 टन सामान एयरलिफ्ट कर यहां पहुंचाया जाता है। बर्फ से बने अस्थाई हेलिपेड पर चॉपर लैंड करता है।

सियाचिन...

सैनिकों के लिए पाकिस्तान से बड़ा दुश्मन है मौसम

{ सियाचिन ग्लेशियर का पानी लद्दाख की नुब्रा नदी का मुख्य स्रोत है।

{ दुनिया का सबसे ऊंचा सोनम हेलिपैड 21 हजार फुुट पर यहीं पर स्थित है।

{ 2009 में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार यह ग्लेशियर अब आधा ही रह गया है।

{ हर रोज सेना की तैनाती पर 7 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। यानी हर सेकंड 18 हजार रुपए। इतनी रकम में एक साल में 4000 सेकेंडरी स्कूल बनाए जा सकते हैं

{ यदि एक रोटी 2 रुपए की है तो यह सियाचिन तक पहुंचते-पहुंचते 200 रुपए की हो जाती है।

{ सर्दियों मेंे सियाचिन में औसतन 1000 सेंटीमीटर बर्फ गिरती है। रात में यहां तापमान -50 डिग्री सेल्सियस रहता है।

{ ऑक्सीजन का स्तर पर भी यहां कम रहता है। यहां टूथपेस्ट भी जम जाता है। सही ढंग से बोलने में भी काफी मुश्किलें आती हैं।

सियाचिन के एक तरफ पाक तो दूसरी तरफ चीन है, इसलिए यह सामरिक नजरिए से अहम है। भारत सियाचिन को छोड़ दे तो पाक-चीन की सीमा मिल जाएगी। दोनाें का गठजोड़ घातक साबित हो सकता है। सबसे अहम ये कि इतनी ऊंचाई से दोनों देशों पर नजर रखना भी आसान है।

1972 के शिमला समझौते के वक्त सियाचिन को इंसानों के लायक नहीं समझा गया। लिहाजा दस्तावेजों में सियाचिन में भारत-पाक के बीच सरहद कहां होगी, इसका जिक्र नहीं किया गया। तब से पािकस्तान सियाचिन पर अपना अधिकार जता रहा है।

तापमान

-25C/-50C तक

{ सियाचिन पर भारतीय फौज की 150 पोस्ट हैं जिसके लिए 10 हजार फौजी तैनात किए गए हैं।

{ यहां ज्यादातर सैनिकों की मौत युद्ध नहीं बल्कि हिमस्खलन से हुई है

{ सैनिक यहां विशेष तरह के इग्लू कपड़ों में रहते है। सैनिक महीने में सिर्फ एक बार नहाते हैं।

{ सैनिकों को यहां हाइपोक्सिया और हाई एल्टीट्यूड जैसी बीमारियां हो जाती है।

{ वजन घटने लगता है। भूख नहीं लगती, नींद नहीं आने की बीमारी। मेमोरी लॉस का भी खतरा।

{ सैनिकाें को यहां रसद पहुंचाने के लिए लगातार हेलिकॉप्टर उड़ान भरते रहते हैं।

{ यहां तैनाती पर अधिकारियों को प्रति माह 21 हजार, सैनिक को हर महीने 14 हजार अलांउस मिलता है।

{ सियाचिन में एक सैनिक की अधिकतम 90 दिन की पोस्टिंग ही होती है।

क्षेत्रफल

700 वर्ग किमी.

ऊंचाई

5753 मीटर

समुद्र तल से

लंबाई

70 किमी.

इंद्राकोल से

नक्शा पैमाने के मुताबिक नहीं

बाल्टिस्तान की बोली बाल्टी में ‘सिया’ का अर्थ है एक प्रकार का ‘जंगली गुलाब’ और ‘चुन’ का अर्थ है ‘बहुतायत’, इसी से यह नाम प्रचलित हुआ। 13 अप्रैल 1984 में भारतीय सेना ने पाकिस्तान की घुसपैठ को नाकाम कर ऑपरेशन ‘मेघदूत’ चला सियाचिन पर कब्जा कर लिया था।

23 हजार फीट तक है ग्लेशियर की ऊंचाई

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