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लास वेगास के बाद बदलेगा गन कल्चर!

4 वर्ष पहले
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फिलिप इलियट, हेली स्वीटलैंट, शैरलट अल्टर

लासवेगासके रूट 91 हार्वेस्ट फेस्टिवल में जब पिछले सप्ताह गोलियां चलनी शुरू हुईं, तो वहां जमा हुए संगीत प्रेमियों को लगा कि यह लाउडस्पीकर की खराबी है। गोलियां रुकने तक यह आधुनिक अमेरिकी इतिहास का सबसे भीषण नरसंहार बन चुका था।

58 से ज्यादा मौतें हुईं और कम से कम 527 लोगों को गोलियां लगी। यह सब एक ऐसे इंसान ने किया, जिसके पास इसका कोई कारण या मकसद नहीं था। उसने 23 हथियार अपने होटल के कमरे में जमा कर लिए और भीड़ पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने लगा। उसके 12 राइफल वैध तरीके से खरीदे गए पार्ट-पुर्जों की मदद से मोडिफाई किए गए थे। वे हर सेकंड नौ राउंड फायर करने में सक्षम थे। ऐसा लड़ाई के मैदानों में भी कम ही देखने को मिलता है। साल दर साल सामूहिक नरसंहारों की घटनाएं नए रिकॉर्ड बना रही हैं, जबकि बंदूकों से संबंधित प्रावधानों का मुद्दा सत्ता शीर्ष पर अटका हुआ है। इधर हथियार रखने का हिमायती पक्ष मौजूदा नियमों को भी कमजोर करने के तरीके निकाल रहा है। यह समस्या ऐसी नहीं है जिसका हल नहीं निकाला जा सके। नए प्रावधान इसकी भीषणता को कम कर सकते हैं। पहले ही फैसला लिया जा चुका है कि ग्रेनेड लॉन्चर आसानी से उपलब्ध हों। हर मिनट 400 राउंड से ज्यादा फायर करने वाले हथियारों के मामले में भी इसे लागू किया जा सकता है। इस मामले में राजनीतिक मतभेद भी उतने गंभीर नहीं हैं। नेशनल राइफल एसोसिएशन और उसके सहयोगियों का प्रभाव सीमित है। बंदूक रखने वालों का बहुमत इसको लेकर नियम-कायदों के पक्ष में है। रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसद भी अपने नजरिये में बदलाव का संकेत दे चुके हैं। दरअसल, समस्या बंदूक रखने के अधिकार से ज्यादा संबंधित भी नहीं है, यह मुद्दा कई तरह की आजादी से जुड़ा है। खतरनाक हथियारों पर बंदिशें लगाने की छोटी कोशिश को भी अमेरिकी नागरिक उनके अधिकारों को सीमित करने के रूप में देखते हैं। लेकिन लास वेगास जैसी घटनाओं से यह सोच जोर पकड़ने लगी है कि हथियार रखने पर बंदिशें होनी चाहिए।

इसके राजनीतिक पहलुओं को समझना थोड़ा मुश्किल है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अध्ययन के मुताबिक अमेरिका में करीब 27 करोड़ बंदूक हैं। यह संख्या पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में डाले गए कुल वोटों से भी ज्यादा है। ये हथियार देश की 30 फीसदी वयस्क आबादी के पास हैं। इनकी राजनीतिक ताकत की अनदेखी नहीं की जा सकती, लेकिन सभी हथियार मालिक बंदिशों के खिलाफ नहीं हैं। जून, 2017 में हुए एक सर्वे में 94 % मतदाताओं ने बंदूक खरीदने वालों की पृष्ठभूमि की जांच का समर्थन किया था। इनमें 93% िपब्लिकन पार्टी के समर्थक भी थे। प्यू के एक सर्वे में 30% बंदूक मालिकों ने इससे संबंधित प्रावधान कड़े करने की वकालत की। फिर भी खतरनाक हथियारों और पृष्ठभूमि की जांच से संबंधित कानून नहीं बन पा रहे हैं क्योंकि एक छोटा लेकिन प्रभावशाली समूह इनके विरोध में है। उसका तर्क है कि यदि मौजूदा कानून नरसंहारों को नहीं रोक सकते तो नए कानूनों के बेहतर होने की क्या गारंटी है। इसमें तर्क से ज्यादा बड़ी बाधा राजनीतिक डर है। एनआरए जैसे संगठन राजनीतिज्ञों के चुनाव में हार के डर को भुनाते हैं। उसकी बात मानने वालों का समूह कड़े चुनावी मुकाबलों में निर्णायक हो सकता है। साल 2004 में बिल क्लिंटन द्वारा असॉल्ट राइफल पर लगाए गए प्रतिबंधों की समयसीमा खत्म होने के बाद गन राइट्स को सीमित रखने का पक्षधर समूह नए कानून की प्रतीक्षा कर रहा था तो विरोधी पक्ष राज्यों में बंदिशों को कमजोर करने में लगा था। नेवादा में 38 फीसदी वयस्कों के पास बंदूक हैं, लोग वैध तरीके से उन्हें खरीद सकते हैं और मैग्जीन की क्षमता पर कोई प्रतिबंध नहीं हैं।

लास वेगास की घटना के बाद भी कैपिटल हिल के नजरिये में कोई बदलाव नहीं दिखा है। स्पीकर पाउल रयान 3 अक्टूबर को पत्रकारों से मिले तो मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने की चर्चा कर रहे थे। उसी दिन सीनेट में बहुमत के नेता मिच मैक्कोनेल ने इससे संबंधित सवालों से परहेज किया। सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता नैन्सी पेलोसी गन वायलेंस पर एक स्थायी समिति बनाए जाने का अभियान चला रही हैं। रिपब्लिकन पार्टी के लिए भी इसका विरोध करना मुश्किल होगा। वे हथियारों से पैदा होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों के अध्ययन के लिए फंड हेतु रिपब्लिक पार्टी को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें मदद की उम्मीद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से है। एनआरए ने उनके चुनाव अभियान पर 3 करोड़ डॉलर खर्च किए थे और पिछले 34 वर्षों में इसके अधिवेशन में शामिल होने वाले वे पहले राष्ट्रपति बने, लेकिन साल 2000 में उन्होंने लिखा था कि असॉल्ट राइफल पर प्रतिबंध के पक्ष में हैं। उन्होंने बंदूक खरीदने की प्रतीक्षा सीमा ज्यादा रखने की वकालत की थी।

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